बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

नागपुर के व्यापारियों का आरोप: रील बनाकर पैसे मांगते हैं छोटे नेता, एफडीए-पुलिस से सांठगांठ

नागपुर के व्यापारियों का आरोप: रील बनाकर पैसे मांगते हैं छोटे नेता, एफडीए-पुलिस से सांठगांठ तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
जुर्म PT24 टीम

इतवारी, वर्धमाननगर और कलमना के व्यापारियों ने कुछ लोगों पर दुकानों और गोदामों में पहुंचकर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

नागपुर जिले के इतवारी, वर्धमाननगर और कलमना जैसे इलाकों के व्यापारियों ने कुछ लोगों पर दुकानों और गोदामों में पहुंचकर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। व्यापारियों का कहना है कि पर्व-त्योहार के दिनों में भी उन्हें ठीक से कारोबार नहीं करने दिया जा रहा है। उनके मुताबिक इसके पीछे सत्ता पक्ष के कुछ छुटभैया नेताओं को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि ये नेता गोदाम और दुकान में पहुंच जाते हैं और रील बनाने के नाम पर 'ब्लैकमेल' करते हैं। अनाज, किराना और तेल के कारोबार से जुड़े व्यापारियों को भी निशाने पर रखा जा रहा है। व्यापारियों के मुताबिक सबसे हैरानी की बात यह है कि इन नेताओं के संपर्क कुछ एफडीए और पुलिस के लोगों से हैं।

व्यापारियों ने बताया कि जैसे ही वे नेताओं पर दबाव बनाते हैं, नेता फोन करके इन अधिकारियों को बुला लेते हैं और फिर व्यापारियों को 'झुकना' पड़ता है। उनका कहना है कि झूठे मामले बनाकर परेशान करने का यह नया सिलसिला शुरू हो गया है। व्यापारियों के मुताबिक छुटभैया नेता दिनभर गोदाम, ट्रांसपोर्ट कार्यालय और दुकानों के आसपास चक्कर लगाते रहते हैं।

जैसे ही कोई ट्रक माल लेकर आता है, वे पहुंच जाते हैं और व्यापारियों से माल और कागजात दिखाने की मांग करने लगते हैं। व्यापारियों को ऐसा लगता है मानो वे राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एफडीए और पुलिस विभाग के अधिकारी या कर्मचारी हों। व्यापारियों का आरोप है कि ये लोग ट्रकों, दुकानों और गोदामों की रील बनाने लगते हैं, फिर धमकी देकर पैसों की मांग करते हैं। मना करने पर तुरंत इन विभागों के अधिकारियों को बुला लिया जाता है, और अधिकारी भी उनके इशारों पर ऐसे काम करते हैं मानो नेता उनके बॉस हों।

व्यापारियों का कहना है कि नेताओं से बहस शुरू होते ही अधिकारी और कर्मचारी पहुंच जाते हैं। उन्हें साफ लगता है कि नेताओं से मिलीभगत है और पहले से तय रहता है कि किस प्रतिष्ठान में कब पहुंचना है। व्यापारियों के मुताबिक यह खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है।

व्यापारियों ने बताया कि इसकी शिकायत कई बार पुलिस आयुक्त और एफडीए आयुक्त से की गई और स्थानीय अधिकारियों के बारे में जानकारी भी दी गई। उनका कहना है कि कुछ समय के लिए मामला दब जाता है, लेकिन फिर यही खेल शुरू हो जाता है, खासकर त्योहारों के दौरान।

किराना, तेल, मसाला, दूध, पनीर और सुपारी के कारोबार से जुड़े व्यापारी इससे बुरी तरह परेशान हैं। उनका कहना है कि नेताओं और अधिकारियों को हर माल मिलावटी नजर आता है। व्यापारियों के मुताबिक हकीकत यह है कि लैब से टेस्ट रिपोर्ट आने पर 75-80 फीसदी मामलों में मिलावट नहीं मिलती, लेकिन इस बीच माल फंस जाता है। रेड से व्यापारी इसलिए डरते हैं कि उनकी पूंजी अटक जाती है और माल बर्बाद हो जाता है।

व्यापारियों का डर दरअसल इसी बात का है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) माल जब्त कर लेता है और लैब की रिपोर्ट आने तक वह फंसा रहता है। वे नहीं चाहते कि त्योहार के दौरान उनका करोड़ों का माल जब्त रहे। इसलिए वे कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं, और इसी मजबूरी का फायदा राजनेताओं का गठबंधन उठा लेता है। व्यापारियों में एकजुटता की कमी भी इसकी बड़ी वजह बताई गई है, क्योंकि कोई भी बार-बार पुलिस और एफडीए के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता।

एनवीसीसी के अध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर ने कहा कि नागपुर शहर का कारोबारी माहौल अच्छा है और इसे अच्छा बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी की है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यापारिक प्रतिष्ठान को रात-बेरात खुलवाने की परंपरा ठीक नहीं है और यह माहौल खराब करने वाली बात है। उनके मुताबिक जल्द ही आला अधिकारियों से प्रतिनिधि मंडल मिलेगा और उचित कदम उठाने के लिए बात करेगा।

बीजेपी ट्रांसपोर्ट मोर्चा के अध्यक्ष शिव परमार ने कहा कि रात में डेढ़-दो बजे कुछ लोग आसानी से गोदामों और दुकानों में घुस जाते हैं और तोड़फोड़ करते हैं। उनके मुताबिक यह प्रवृत्ति शहर के लिए ठीक नहीं है। परमार ने कहा कि छोटे-छोटे नेता अपनी पार्टी का नाम धूमिल कर रहे हैं और व्यापार का माहौल भी खराब कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारी इसका पुरजोर विरोध करेंगे और पुलिस व एफडीए के अधिकारियों से जल्द मुलाकात कर उन्हें हालात से अवगत कराया जाएगा। परमार ने यह भी कहा कि इससे पुलिस-प्रशासन की छवि खराब हो रही है और बड़े अधिकारियों को इस पर ध्यान देना होगा कि छोटे लोगों के बुलाने पर पुलिस और एफडीए के अधिकारी रात को प्रतिष्ठान कैसे खुलवा लेते हैं।

#नागपुर#जुर्म#PT24#Crime#Nagpur

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे