मंगलवार, 3 नवंबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

नागपुर के फ्लाईओवरों पर धीमे चलते ई-रिक्शा से बड़े हादसे का खतरा

नागपुर के फ्लाईओवरों पर धीमे चलते ई-रिक्शा से बड़े हादसे का खतरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नागपुर के प्रमुख फ्लाईओवरों पर ई-रिक्शा की आवाजाही से सड़क सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। ओवरलोडिंग, बिना इंडिकेटर मोड़ और अचानक लेन बदलने की शिकायतें हैं।

नागपुर में ट्रैफिक जाम, सिग्नल और हादसों से राहत देने के लिए शहर में फ्लाईओवरों का जाल तेजी से बिछाया जा रहा है। लेकिन इन्हीं फ्लाईओवरों पर ई-रिक्शा की आवाजाही अब सड़क सुरक्षा का बड़ा सवाल बन गई है। कहा जा रहा है कि असुरक्षित बनावट वाले और आड़ी-तिरछी चाल से रेंगते ये ई-रिक्शा किसी भी समय बड़े हादसे की 100 प्रतिशत वजह बन सकते हैं। इस खतरे को पुलिस और प्रशासन, दोनों अनदेखा कर रहे हैं।

शिकायत यह है कि शहर की सड़कों की तरह फ्लाईओवरों पर भी ई-रिक्शा चालकों में ट्रैफिक नियमों का कोई डर नजर नहीं आता। क्षमता से ज्यादा सवारियां बिठाना, बिना इंडिकेटर दिए अचानक मोड़ लेना या लेन बदलना और ओवरटेक की कोशिश करना रोज की बात हो चुकी है। फ्लाईओवर की चौड़ाई सीमित होती है। ऐसे में जब कोई ई-रिक्शा बीच सड़क पर धीमे चलता है, तो पीछे से आ रहे वाहन चालक हड़बड़ाहट में काबू खो बैठते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।

गति का फर्क भी बड़ा है। फ्लाईओवर पर चारपहिया वाहन, बसें और कारें 60 से 80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं। चढ़ाई पर ई-रिक्शा की रफ्तार घटकर 10 से 15 किमी प्रति घंटा रह जाती है। अचानक सामने रेंगता ई-रिक्शा दिखे, तो पीछे से तेज आ रही गाड़ियों के पास ब्रेक लगाने का वक्त ही नहीं बचता। चढ़ाई और ढलान वाले फ्लाईओवरों पर यह खतरा और बढ़ जाता है। ई-रिक्शा शहर के भीतरी, संकरे और धीमी गति वाले इलाकों के लिए बनाए गए थे।

ई-रिक्शा की बनावट भी जोखिम बढ़ाती है। उसमें न मजबूत मेटल बॉडी होती है, न यात्रियों की हिफाजत के लिए दरवाजे। पीछे से कोई कार या ट्रक हल्की सी भी टक्कर मार दे, तो ई-रिक्शा ताश के पत्तों की तरह बिखर सकता है। उसमें बैठे लोग फ्लाईओवर से नीचे गिर सकते हैं या कुचले जा सकते हैं। यानी खतरा सिर्फ चालक को नहीं, उसमें बैठी सवारियों को भी है।

जिन फ्लाईओवरों का जिक्र किया गया है, उनमें रामझूला, सीताबर्डी, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार उड़ानपुल, ज्ञानयोगी डॉ. श्रीकांत जिचकार सदर फ्लाईओवर, कामठी रोड का डबल डेकर फ्लाईओवर और वर्धा रोड का डबल डेकर फ्लाईओवर शामिल हैं। कहा गया है कि इन सभी पर ई-रिक्शा का रेंगना बड़े हादसे को न्योता देता है।

मांग है कि ई-रिक्शा को फ्लाईओवर से पूरी तरह बैन किया जाए। तर्क यह है कि फ्लाईओवर का मकसद वाहनों को बिना रुकावट मंजिल तक पहुंचाना है। धीमे ई-रिक्शा हटने से हादसे की आशंका कई गुना कम हो जाएगी। नागपुर को स्मार्ट सिटी कहा जाता है, पर फ्लाईओवर पर ट्रैफिक अनुशासन ही न हो तो सुरक्षा का दावा बेमानी है।

सिटी ट्रैफिक पुलिस, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) और स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि अब हादसों का इंतजार बंद करें। जब तक फ्लाईओवरों पर ई-रिक्शा की एंट्री जारी रहेगी, निर्दोष लोगों की जान पर खतरा बना रहेगा। प्रशासन को तय करना होगा कि फ्लाईओवर तेज और सुगम ट्रैफिक के लिए है या सस्ते हादसों की नुमाइश के लिए। सुझाव है कि ई-रिक्शा को नीचे की सर्विस रोड तक सीमित किया जाए।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे