नागपुर के चौराहों पर भीख और बाल मजदूरी से परेशान वाहन चालक, इंदौर जैसी कार्रवाई की मांग
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नागपुर के सिग्नलों पर पैसे मांगने, मना करने पर गालीगलौज और बच्चों से काम कराने की शिकायतें हैं। इंदौर की तर्ज पर रेस्क्यू और पुनर्वास अभियान की मांग उठी है।
नागपुर के बड़े चौराहों और ट्रैफिक सिग्नलों पर भीख मांगने की समस्या बढ़ने की शिकायतें आ रही हैं। इससे गाड़ी चलाने वालों की परेशानी बढ़ गई है। बच्चों और जरूरतमंदों को देखकर लोग सहानुभूति में पैसे दे देते हैं, लेकिन कई जगह बात जबरन वसूली और बदसलूकी तक पहुंच जाती है।
शिकायतों के मुताबिक कुछ बच्चे हाथ में पानी की बोतल और कपड़ा लेकर बिना पूछे गाड़ियों के शीशे साफ करने लगते हैं। उसके बाद वे पैसे मांगते हैं। अगर वाहन चालक पैसे देने से मना कर दे, तो आरोप है कि उसे गालियां दी जाती हैं। गाड़ी पर हाथ मारने या उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की बात भी कही जा रही है।
इसी से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इन बच्चों से यह काम आखिर कौन करवा रहा है और उनकी कमाई किसके हाथ में जाती है।
चौराहों पर बच्चों के इस तरह इस्तेमाल से बाल मजदूरी और संगठित भिक्षावृत्ति का शक भी पैदा होता है। कुछ जगहों पर शारीरिक असमर्थता दिखाकर पैसे मांगने वाले लोगों के साथ बच्चे भी नजर आते हैं। आरोप यह भी है कि कुछ बच्चों को दूसरे शहरों से लाकर इस काम में लगाया जाता है।
इसके अलावा कुछ लोग किन्नरों का डर दिखाकर भी गाड़ी वालों से पैसे निकलवाने की कोशिश करते हैं। इन सब बातों से आम लोगों में बेचैनी और असुरक्षा का एहसास बढ़ रहा है। लोग प्रशासन से पूछ रहे हैं कि सार्वजनिक जगहों पर चल रही इन हरकतों पर असरदार कार्रवाई कब होगी।
इस मामले में इंदौर की पहल को मिसाल की तरह देखा जा रहा है। वहां जिला प्रशासन ने भिक्षावृत्ति के खिलाफ प्रतिबंधात्मक आदेश निकाला और रेस्क्यू, काउंसलिंग और पुनर्वास का अभियान चलाया। यह सब केंद्र सरकार की स्माइल योजना और भिक्षावृत्ति मुक्त भारत पायलट परियोजना के तहत किया गया।
अभियान में सड़कों, चौराहों और धार्मिक स्थलों से भिक्षुकों को रेस्क्यू करके आश्रय गृहों और पुनर्वास केंद्रों तक पहुंचाया गया। जरूरतमंदों को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर रहा, जबकि बुजुर्ग और असमर्थ भिक्षुकों को देखभाल केंद्रों में भेजने की बात भी कही गई।
इंदौर में सार्वजनिक जगहों पर भीख मांगने, भीख देने, भिक्षा में सामान देने और भिक्षुकों से सामान खरीदने पर रोक के आदेश जारी हुए। आदेश तोड़ने पर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया। लोग भिक्षावृत्ति की सही जानकारी प्रशासन को दें, इसके लिए सत्यापन के बाद 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान बताया गया है।
प्रशासन का मानना है कि भिक्षावृत्ति के पीछे कई बार संगठित गिरोह, बाल मजदूरी और मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ भीख मांगने वालों पर कार्रवाई काफी नहीं है। बच्चों को ऐसे नेटवर्क से बचाना और जरूरतमंदों का पुनर्वास करना भी जरूरी है।
नागपुर में भी ऐसी समस्या से निपटने के लिए असरदार अभियान, नियमित निगरानी और पुनर्वास की व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है। अब सवाल यही है कि मुख्यमंत्री के शहर नागपुर में इंदौर की तर्ज पर ऐसी पहल कब शुरू होगी।
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