इंदौर कार्यक्रम में पीएम मोदी की मिमिक्री पर राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर विवाद, सुनील लाहरी नाराज
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में इंदौर के एक कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणी ने पीएम मोदी की मिमिक्री की, जिसके बाद राजनीतिक विवाद और अभिनेता सुनील लाहरी की नाराजगी सामने आई।
कांग्रेस के नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में इंदौर में हुए एक कार्यक्रम का एक हिस्सा इन दिनों चर्चा में है। 19 सितंबर को इंदौर में 'छात्रों की गूंज' नाम से यह कार्यक्रम रखा गया था। इसमें विद्यार्थियों से बात करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों और पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाए। इसी कार्यक्रम में स्टैंड-अप कॉमेडियन पुलकित मणी ने पीएम मोदी के बोलने के अंदाज और कुछ सार्वजनिक मौकों की नकल पेश की।
पुलकित मणी के इस परफॉर्मेंस में पीएम मोदी के अंग्रेजी बोलने के तरीके का जिक्र आया, साथ ही विदेशी नेताओं से मिलते वक्त उनकी जिस शैली को 'हग डिप्लोमेसी' कहकर चर्चा में लाया जाता रहा है, उसका भी संदर्भ लिया गया। एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए भी मजाक बनाया गया, जिसमें पीएम ने एक बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने की पेशकश की थी।
इस मिमिक्री के दौरान राहुल गांधी मंच पर मौजूद थे और वीडियो में वह इस पेशकारी पर हंसते हुए दिखाई देते हैं। कार्यक्रम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जिसके बाद भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। वहीं दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से इस परफॉर्मेंस का बचाव करते हुए कहा गया कि यह सिर्फ हास्य और मिमिक्री का हिस्सा था। इस तरह कार्यक्रम की इस प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
'रामायण' सीरियल में लक्ष्मण का रोल निभा चुके एक्टर सुनील लाहरी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए राहुल गांधी की मौजूदगी में पीएम मोदी की मिमिक्री किए जाने पर नाराजगी जताई। अपनी पोस्ट में सुनील लाहरी ने लिखा कि आगे कभी भी देश की बागडोर ऐसे नेता को देना उचित होगा जो देश की संस्कृति, मातृभाषा और गले मिलने की प्रथा का मजाक उड़ाए।
सुनील लाहरी ने पीएम के मातृभाषा में भाषण देने पर होने वाली आलोचना, भारतीय संस्कृति और परंपराओं को लेकर बनाए गए मजाकों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी नेता के पद और देश की सांस्कृतिक कद्र का सम्मान बना रहना चाहिए। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि अंग्रेजी सिर्फ एक भाषा है और कई देशों के नेता अपनी मातृभाषा में ही भाषण देते हैं। साथ ही उन्होंने बुजुर्ग महिला को कुर्सी देने जैसे मौके का मजाक उड़ाए जाने पर भी सवाल खड़े किए और इस पूरे मामले को गंभीरता से देखने की अपील की।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक नेता, कलाकार और सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक व्यंग्य और सार्वजनिक पद पर बैठे लोगों के सम्मान से जुड़ा यह विवाद फिलहाल चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।