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19:03 IST

नागभीड में ओबीसी संगठन का धरना, जनगणना में अलग कॉलम की मांग

अखिल भारतीय ओबीसी संगठन ने नागभीड में धरना देकर जातिवार जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम रखने की मांग की।

नागभीड में ओबीसी संगठन का धरना, जनगणना में अलग कॉलम की मांग तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागभीड में मंगलवार को ओबीसी समाज के लोगों ने धरना आंदोलन किया। मांग यह थी कि सन 2026-27 में होने वाली जातिवार जनगणना में ओबीसी के लिए अलग कॉलम रखा जाए। यह आंदोलन अखिल भारतीय ओबीसी संगठन की ओर से किया गया।

धरने के बाद संगठन के लोगों ने तहसीलदार के जरिए प्रधानमंत्री और जनगणना आयुक्त के नाम ज्ञापन सौंपा। संगठन का कहना है कि जब तक ओबीसी समाज की असली आबादी तय नहीं होती, तब तक शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और निधि में उसका हिस्सा तय नहीं किया जा सकता।

ज्ञापन में भी यही बात रखी गई। उसमें कहा गया कि ओबीसी की वास्तविक आबादी तय हुए बिना शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आरक्षण और बजट के निधि में आबादी के अनुपात में हिस्सा तय नहीं हो सकता। इसलिए जनगणना के फॉर्म में ओबीसी समाज के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए, ऐसी मांग की गई।

केंद्र सरकार ने 30 अप्रैल 2025 को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में जातिवार जनगणना कराने का फैसला लिया था। संगठन का दावा है कि 22 जनवरी 2026 और 14 अगस्त 2026 को जारी राजपत्रों में अलग ओबीसी कॉलम का साफ जिक्र नहीं है। इसी वजह से ओबीसी समाज की सही आबादी सामने आने के लिए अलग कॉलम के साथ जातिवार जनगणना की मांग उठाई गई।

इस बीच महेंद्र ब्राह्मणवाडे ने आंदोलन की जगह पहुंचकर आंदोलनकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा, "ओबीसी समाज की वास्तविक आबादी सामने आना सामाजिक न्याय के लिहाज से अहम है। शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकार की अलग-अलग योजनाओं में आबादी के अनुपात में हक का हिस्सा तय करने के लिए सटीक आंकड़े जरूरी हैं। इसलिए जातिवार जनगणना में ओबीसी समाज के लिए अलग कॉलम होना जरूरी है, और सरकार को इस मांग पर सकारात्मक ढंग से विचार करना चाहिए।"

धरने में संगठन के अध्यक्ष दिगांबर चौधरी, तालुका कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद चौधरी, संगठन के उपाध्यक्ष शिवशंकर कोरे और सचिव श्रीपत मटाले मौजूद थे। उनके साथ सिताराम बावणकर, पुरुषोत्तम बगमारे, दौलत समर्थ, विनाजी निकुरे, गजानन देशकर, हरिदास ठाकरे, अशोक समर्थ, डॅनियल देशमुख, राजू मोरांडे, प्रकाश चौधरी, नितीन हेमने, शुभम हेमने, सुधाकर राऊत और विष्णू मोहुर्ले भी थे।

महिलाओं में सौ. यामिनी निकोडे, सौ. गीता ठवरे, सौ. लता देशमुख, सौ. संगीता लडके, सौ. कुसुम चौधरी, सौ. प्रेमलता बाबनकर, सौ. रुंदा देशमुख, सौ. सुनिता डोईजड, सौ. उत्तरा कोरे, सौ. अलका बघमरे और सौ. मयुरी मोहुर्ले शामिल हुईं। इनके अलावा ओबीसी समाज के बड़ी संख्या में लोग धरने में पहुंचे।

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