गुरूवार, 17 सितमबर 2026

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01:34 IST

तेरहवीं कर समाधि बना दी थी, एक साल बाद जिंदा लौटी महिला, परिवार भावुक

गडचिरोली की एक महिला मानसिक हालत ठीक न होने के कारण एक साल पहले घर से निकल गई थी। परिवार ने उसे मृत मानकर तेरहवीं और समाधि तक बना दी थी, लेकिन एक वायरल वीडियो से पता चला कि वह जिंदा है और आखिरकार वह घर लौट आई।

तेरहवीं कर समाधि बना दी थी, एक साल बाद जिंदा लौटी महिला, परिवार भावुक
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

विदर्भ से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। गडचिरोली जिले के एटापल्ली तालुका के सुरजागड इलाके के मोहरली गांव की रहने वाली साठ साल की दस्सो मुक्का कांदो मानसिक हालत ठीक न होने की वजह से करीब एक साल पहले अचानक घर से निकल गई थीं।

परिवार वालों ने छत्तीसगढ़ समेत कई इलाकों में उन्हें ढूंढने की पूरी कोशिश की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। दिन बीतते गए और तलाश की उम्मीद टूटती गई। आखिरकार परिवार ने मान लिया कि उनकी मौत हो चुकी है। कुछ महीने पहले स्थानीय परंपरा के मुताबिक कपड़े गड्ढे में रखकर उनकी समाधि बना दी गई, तेरहवीं का कार्यक्रम किया गया और पूरे गांव को खाना भी खिलाया गया।

इसी दौरान मुक्का कांदो नागभीड तालुका के तळोधी बाळापूर इलाके में सड़क किनारे भटकती हुई एक स्थानीय व्यक्ति की नजर में आईं। उस व्यक्ति ने इंसानियत दिखाते हुए तुरंत नांदेड (तालुका नागभीड) स्थित 'डोमाजी आधार फाऊंडेशन' के छत्रपती शिवाजी महाराज आश्रम से संपर्क किया। खबर मिलते ही आश्रम के सदस्य परमेश्वर मळावी मौके पर पहुंचे और इस बेसहारा महिला को आश्रम में भर्ती कराया।

आश्रम में नागपुर के मानसिक रोग अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह पर उनका जरूरी इलाज किया गया। सही देखभाल और दवाओं से उनकी हालत धीरे धीरे सुधरती गई। इसके बाद आश्रम की तरफ से उनके रेस्क्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया। यह वीडियो दस्सो के भतीजे समेत गांव के लोगों ने देखा, जिससे परिवार को पता चला कि एक साल से लापता उनकी मां जिंदा है।

पूरी तरह यकीन होने के बाद डोमाजी आधार फाऊंडेशन के परमेश्वर मळावी, रजनी कुंभारे, मनीष खोब्रागडे, आशिष खोब्रागडे, आदित्य उईके और समृद्ध खोब्रागडे गाड़ी से पांच घंटे का सफर तय कर मुक्का कांदो को उनके गांव मोहरली सुरक्षित पहुंचाने गए। दरवाजे पर मां को जिंदा खड़ा देखकर पति, बेटे और बेटी की आंखों से आंसू छलक पड़े। जिस मां की समाधि बना दी गई थी, वही मां दोबारा सामने आने पर पूरा गांव खुशी से भर उठा।

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