मुंबई की 87 बेकरियां अब भी जला रही हैं लकड़ी-कोयला, BMC कार्रवाई की तैयारी में
हाईकोर्ट की मुहलत खत्म होने के बाद भी 87 लाइसेंसशुदा बेकरियों में लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल जारी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई में हवा के बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने जो मुहलत दी थी, वह खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद शहर की 87 लाइसेंसशुदा बेकरियों ने लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं किया है। कोर्ट ने मुहलत बढ़ाने की मांग भी ठुकरा दी, इसलिए अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका सख्त रुख में आ गई है।
महानगरपालिका इन 87 बेकरियों पर सीधी कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जो साफ ईंधन की तरफ नहीं मुड़ीं। जो दूसरी बेकरियां बिना इजाजत लकड़ी जला रही हैं, उन पर भी कार्रवाई हो सकती है। यह मुहिम महानगरपालिका का स्वास्थ्य विभाग और फायर ब्रिगेड मिलकर चलाएंगे।
शहर में कुल 583 लाइसेंसशुदा बेकरियां दर्ज हैं। इनमें से पांच हमेशा के लिए बंद हो चुकी हैं। बाकी में से ज्यादातर बेकरियों ने अपने यहां सुधार कर लिया है, लेकिन 87 में अब भी पुराने ईंधन से ही काम चल रहा है। सामने आया है कि मुंबई के PM10 प्रदूषण में इन बेकरियों का हिस्सा करीब 3.5 प्रतिशत है।
बॉम्बे एन्वायरनमेंट एक्शन ग्रुप की स्टडी के मुताबिक कई बेकरियों में पुराने फर्नीचर की रंगी हुई और प्रोसेस की हुई बेकार लकड़ी जलाई जाती है। इसके धुएं से हवा में खतरनाक वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड घुल जाते हैं। इससे मुंबई वालों में सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। साथ ही स्मॉग और नुकसानदेह ओजोन का स्तर बढ़ने में भी इसका हाथ है।
जनवरी 2025 में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बेकरियों को एलपीजी, पीएनजी या बिजली जैसे साफ ईंधन पर आने के लिए छह महीने की मुहलत दी थी। इसके बाद महानगरपालिका ने बेकरी वालों को नोटिस भेजे। उन्हें PMFME योजना से आर्थिक मदद दिलाने के लिए मार्गदर्शन शिविर भी लगाए गए। फिर भी 87 बेकरियों ने नियमों को ताक पर रखा हुआ है।
दूसरी तरफ जिन कारोबारियों ने साफ ईंधन अपना लिया, उनका कहना है कि बढ़े हुए दामों ने उनकी कमर तोड़ दी है। भायखला के बेकरी चलाने वाले मिर्जा गयासुद्दीन बेग के मुताबिक साफ ईंधन पर चलने वाला सिस्टम लगाने में 20 लाख रुपये तक की पूंजी लगानी पड़ी। एलपीजी के रेट की वजह से उनका महीने का ईंधन खर्च तीन गुना हो गया है।
इसलिए बेकरी वालों की मांग है कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए कारोबार भी टिका रहे, इसके लिए प्रशासन साफ ईंधन पर सब्सिडी दे। एक तरफ बढ़ते खर्च की चुनौती है और दूसरी तरफ महानगरपालिका की संभावित कार्रवाई। इन दोनों के बीच ये बेकरी वाले फंसे हुए हैं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।