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01:33 IST

दिल्ली में प्रदूषण का असर मौसम के 51 घंटे बाद दिखता है, पुणे IITM की स्टडी में खुलासा

पुणे के IITM वैज्ञानिक विवेक सिंग की रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में तापमान, नमी और हवा की स्पीड का असर PM 2.5 पर तुरंत नहीं, बल्कि कई घंटों बाद दिखता है।

दिल्ली में प्रदूषण का असर मौसम के 51 घंटे बाद दिखता है, पुणे IITM की स्टडी में खुलासा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

दिल्ली की हवा में जो जहर घुलता है, उसके पीछे सिर्फ गाड़ियों का धुआं और फैक्ट्रियों से निकलने वाला उत्सर्जन ही नहीं, बल्कि मौसम का भी बड़ा हाथ होता है। पुणे की इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटिओरोलॉजी यानी IITM के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है। खास बात यह है कि मौसम में होने वाले बदलाव का असर प्रदूषण के लेवल पर फौरन नहीं होता, बल्कि कुछ मौसमी फैक्टर का असर पूरे 51 घंटे की देरी से दिखता है।

यह रिसर्च 'एन्वायरनमेंटल साइंस: एटमॉस्फियर्स' नाम की पत्रिका में छपी है। IITM के मुख्य शोधकर्ता विवेक सिंग और उनकी टीम ने 2017 से 2025 तक दिल्ली के मौसम और PM 2.5 प्रदूषण के आंकड़ों को खंगाला। इसमें तापमान, नमी, बारिश, हवा की स्पीड, सूरज की किरणों की तीव्रता, जमीन पर दबाव और वातावरण की निचली परत यानी बाउंड्री लेयर की ऊंचाई, इन सब का PM 2.5 के लेवल से क्या रिश्ता है, यह चेक किया गया।

स्टडी के मुताबिक तापमान में होने वाले बदलाव का PM 2.5 पर असर दिखने में 51 घंटे तक की देरी हो सकती है। नमी और हवा की स्पीड का असर भी कुछ घंटों बाद ही सामने आता है। तापमान के लिए यह देरी तीन घंटे, नमी के लिए चार घंटे, बारिश के लिए पांच घंटे, जबकि हवा की स्पीड के लिए करीब 11 घंटे पाई गई।

सर्दियों में वातावरण की निचली परत यानी बाउंड्री लेयर की ऊंचाई 500 मीटर से भी कम हो जाती है। इससे प्रदूषक कणों को ऊपर के वातावरण में फैलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, वे जमीन के पास ही अटक जाते हैं और PM 2.5 का लेवल तेजी से बढ़ता है। हवा कम चलने से भी प्रदूषण जमा होता रहता है, जबकि तेज हवा प्रदूषक कणों को बिखेरने में मदद करती है।

रिसर्च में यह भी सामने आया कि दिल्ली में सुबह 6 से 9 बजे और रात 8 से 11 बजे के बीच प्रदूषण सबसे ज्यादा रहता है। नवंबर से जनवरी के बीच PM 2.5 का लेवल कई बार 200 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ऊपर पाया गया। स्टडी के दौरान यह लेवल अधिकतम 879.6 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक पहुंच गया था। वहीं मानसून में बारिश और हवा की वजह से यह लेवल 50 से भी नीचे आ जाता है।

2017 से 2025 के बीच दिल्ली में PM 2.5 के औसत लेवल में धीरे-धीरे लेकिन लगातार गिरावट दर्ज हुई है। 2017 में यह औसत 127.7 था, जो 2025 में घटकर 80 तक आ गया। मौसम और प्रदूषण के बीच का यह रिश्ता साफ होने से आने वाले समय में प्रदूषण का अंदाजा लगाने और पहले से चेतावनी देने वाला सिस्टम और ज्यादा सटीक बनाने में यह रिसर्च मदद कर सकती है।

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