मुंबई के महापौर कार्यालय को फिर धमकी भरा ई-मेल, स्कूल और महालक्ष्मी रेसकोर्स का जिक्र
मुंबई के महापौर कार्यालय को एक और धमकी भरा ई-मेल मिला है। इसमें 31 अक्टूबर को एक स्कूल पर ग्रेनेड हमले और 27 नवंबर को महालक्ष्मी रेसकोर्स इलाके में बम धमाके की धमकी दी गई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के महापौर कार्यालय को एक धमकी भरा ई-मेल मिला है, जिससे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई है। जानकारी के मुताबिक इस ई-मेल में 31 अक्टूबर को एक स्कूल पर ग्रेनेड हमला करने की धमकी दी गई है। इसी तरह 27 नवंबर को महालक्ष्मी रेसकोर्स इलाके में बम धमाका करने की बात भी लिखी गई है।
बताया जा रहा है कि ई-मेल में खलिस्तान और कुछ संगठनों का जिक्र है। हालांकि इन जिक्रों के आधार पर यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि इस मामले का किसी संगठन से कोई संबंध है। इस पूरे मामले के बाद मुंबई पुलिस समेत संबंधित सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
धमकी भरे ई-मेल को गंभीरता से लिया गया है। जांच चल रही है कि यह ई-मेल किसने भेजा, उसका स्रोत क्या है और इसके पीछे असली मकसद क्या है। यह भी परखा जा रहा है कि ई-मेल की धमकियां सच्ची हैं या लोगों में डर फैलाने के लिए यह सब किया गया है।
स्कूल और महालक्ष्मी रेसकोर्स जैसी जगहों का नाम आने से संभावित सुरक्षा खतरों की जांच जरूरी हो गई है। जांच एजेंसियां डिजिटल सबूत और ई-मेल से जुड़ी तकनीकी जानकारी खंगाल रही हैं। संबंधित जगहों की सुरक्षा का जायजा लेने और जरूरी एहतियात बरतने को पहली प्राथमिकता दी जा रही है।
महापौर कार्यालय को धमकी भरा ई-मेल मिलने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 10 जून 2026 को महापौर कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज समेत कुछ अहम जगहों पर धमाके की धमकी देने वाले ई-मेल आए थे। तब पुलिस और बम निरोधक दस्तों ने उन जगहों की जांच की थी। जांच के दौरान कोई संदिग्ध चीज या विस्फोटक नहीं मिला था।
उसके बाद 7 अगस्त 2026 को महापौर कार्यालय को फिर धमकी भरा ई-मेल मिला। उसमें स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में रुकावट डालने की धमकी दी गई थी। उस ई-मेल में मुंबई मेट्रो, स्कूल और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का भी जिक्र था। इन घटनाओं से मुंबई के अहम सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा का सवाल फिर चर्चा में आ गया है।
ई-मेल बार-बार आ रहे हैं, इसलिए भेजने वाले का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए अहम हो गया है। ऐसे मामलों में ई-मेल की तकनीकी डिटेल, मिल सके तो आईपी एड्रेस और डिजिटल सबूतों के आधार पर भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश होती है। कुछ मामलों में वीपीएन या दूसरे तकनीकी साधन इस्तेमाल हुए हों तो ई-मेल का असली स्रोत ढूंढना और मुश्किल हो सकता है। इसलिए साइबर जांच और तकनीकी विश्लेषण की खास अहमियत है। इस मामले में ई-मेल कहां से भेजा गया, भेजने वाला कौन है और धमकी का मकसद क्या है, इस बारे में अब तक कोई आधिकारिक नतीजा सामने नहीं आया है।
ई-मेल के दावे सच हैं या सिर्फ डर फैलाने की कोशिश, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा। धमकी भरा ई-मेल आने का मतलब यह नहीं कि विस्फोटक या हमले का खतरा पक्का हो गया है। इसलिए लोगों को बेवजह डरने के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
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