मुंबई के केईएम अस्पताल में खून और पीआरबीसी के लिए मरीजों के रिश्तेदारों की भागदौड़
परळ के केईएम अस्पताल में दो मरीजों के परिजनों को खून और रक्तघटक जुटाने में कई दिन लगे।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई के परळ में स्थित केईएम अस्पताल से दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीजों के रिश्तेदारों को इलाज के लिए खून और रक्तपेशियां जुटाने में काफी भागदौड़ करनी पड़ी। इन दोनों घटनाओं के बाद रक्तघटकों की उपलब्धता और वक्त पर होने वाली सप्लाई को लेकर चिंता जताई जा रही है।
पहला मामला एक महिला मरीज का है, जिनका केईएम अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्हें बी पॉजिटिव ग्रुप की छह यूनिट पीआरबीसी यानी लाल रक्तपेशियों की जरूरत है। मरीज के पति ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक वे पिछले तीन दिनों से अलग-अलग जगह पूछताछ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक जरूरी रक्तपेशियां मिली नहीं हैं। गंभीर हालत में इलाज के लिए जरूरी रक्तघटक जुटाने में रिश्तेदारों को कितनी दौड़ लगानी पड़ती है, यह इस मामले से दिखता है।
दूसरा मामला एक बुजुर्ग मरीज का है, जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी सर्जरी के लिए ए पॉजिटिव ग्रुप की दो यूनिट खून की जरूरत थी। मरीज के बेटे ने जानकारी दी कि खून जुटाने की कोशिश लगातार तीन दिन चलती रही। आखिरकार चौथे दिन दो यूनिट खून का इंतजाम हो पाया। इनमें से एक यूनिट अस्पताल के ब्लड बैंक ने दी, जबकि दूसरी यूनिट मरीज के बेटे ने खुद कोशिश करके जुटाई।
इसके बाद सर्जरी की गई और फिलहाल खून की जरूरत पूरी हो चुकी है। दोनों मरीजों के रिश्तेदारों ने कहा कि खून या रक्तघटक हासिल करने के लिए उन्हें युद्धस्तर पर कोशिश करनी पड़ी।
अस्पताल में इलाज के दौरान जरूरी रक्तघटक वक्त पर मिलना बहुत अहम होता है। लेकिन इसके लिए रिश्तेदारों को कई दिन तक भटकना पड़े, तो मरीजों की देखभाल पर दबाव का सवाल खड़ा होता है। इस बीच, राज्य रक्त संक्रमण परिषद से संपर्क किया गया, तो कोई जवाब नहीं मिला।
इन दो मामलों से यह साफ नहीं होता कि मुंबई में खून की कुल कमी कितनी है। फिर भी मरीजों को रक्तघटक जुटाने में जो दिक्कतें आ रही हैं, उनकी गंभीरता जरूर सामने आती है। शहर में रक्त का स्टॉक, ब्लड ग्रुप के हिसाब से उपलब्धता और ब्लड बैंकों में सप्लाई की स्थिति के आधिकारिक आंकड़े मिलें, तो इस समस्या का दायरा समझ में आ सकेगा।