मुख्यमंत्री फडणवीस ने राष्ट्रपति मुर्मू को दिया नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेले के ध्वजारोहण का न्योता
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण समारोह का औपचारिक निमंत्रण दिया।
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नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण समारोह के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न्योता दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में उनसे मुलाकात की और 31 अक्टूबर को नाशिक व त्र्यंबकेश्वर में होने वाले इस समारोह का औपचारिक निमंत्रण सौंपा। यह समारोह कुंभमेले के भव्य पर्व की शुरुआत माना गया है।
इस मुलाकात में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मौजूद थे। राज्य मंत्रिमंडल के कुछ और मंत्री तथा अधिकारियों और पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी साथ था।
फडणवीस ने राष्ट्रपति को एक खास भेंट सेट भी दिया। इसमें महाराष्ट्र की आध्यात्मिक परंपरा से लेकर आदिवासी उद्यमिता, वस्त्रकला, खेती की समृद्धि और खान-पान की संस्कृति तक, राज्य की कई विरासतों की झलक है। राष्ट्रपति को ध्वजारोहण वाले दिन ही होने वाले दूसरे कार्यक्रमों के लिए भी बुलाया गया है। इनमें गोदा आरती, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण की वेबसाइट का उद्घाटन, कुंभमेला गीत का लोकार्पण, कुंभमेले पर बनी कॉफी टेबल बुक और कुंभमेला डाक टिकट का अनावरण शामिल हैं।
फडणवीस ने इस मुलाकात के बारे में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति को नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभमेला 2027 के धर्मध्वज को फहराने के लिए आदरपूर्वक न्योता दिया। उनके मुताबिक सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों में यह एक अहम पड़ाव है।
मुलाकात में मंत्री छगन भुजबल, गिरीश महाजन, दादाजी भुसे और नरहरि झिरवाल भी थे। महाजन जलसंपदा, आपदा प्रबंधन और कुंभमेला मंत्री हैं और नाशिक जिले के पालकमंत्री भी। भुजबल के पास अन्न व नागरी आपूर्ति और ग्राहक संरक्षण विभाग है, भुसे स्कूली शिक्षा मंत्री हैं और झिरवाल अन्न व औषधि प्रशासन तथा विशेष सहायता मंत्री हैं। नाशिक की महापौर हिमगौरी आडके-आहेर और त्र्यंबक नगर परिषद की नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार भी पहुंची थीं।
त्र्यंबकेश्वर देवस्थान के अध्यक्ष और धर्मादाय सहआयुक्त न्यायमूर्ति विवेक सोनवणे, नाशिक पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचाक्षरी और त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे भी साथ थे। रामतीर्थ गोदावरी सेवा समिति के नरसिंहकृपा दास, सिंहस्थ कुंभमेला प्राधिकरण के अध्यक्ष और संभागीय आयुक्त डॉ. प्रवीण गेडाम और कुंभमेला आयुक्त शेखर सिंह भी मौजूद रहे।
निमंत्रण की बनावट भी अलग है। निमंत्रण पेटी खोलते ही कुंभमेले की पौराणिक पृष्ठभूमि, आध्यात्मिक महत्व और भव्यता दिखाने वाली त्रिआयामी पॉप-अप कलाकृति सामने आती है। इसमें देखने, सुनने, सूंघने, चखने और छूने, यानी पांचों इंद्रियों से जुड़े अनुभव रखे गए हैं। इस सोच से नाशिक की सांस्कृतिक विरासत, पवित्र गोदावरी की महिमा और भारतीय परंपरा में कुंभमेले के खास महत्व को उभारा गया है।
भेंट सेट में आदिवासी विकास विभाग के तहत शबरी नॅचरल्स के उत्पाद हैं। इनमें अगरबत्ती, मोटे अनाज से बने खाने की चीजें, महुए के फूलों से बने उत्पाद, बांस की चीजें और जंगली शहद शामिल हैं। इनसे आदिवासी समाज का पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल और स्थानीय उद्यमिता की ताकत सामने आती है। आदिवासी कारीगरों के हुनर, स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने की कोशिशों और समुदायों की आर्थिक मजबूती का संदेश भी इसके जरिए दिया गया है।
सेट में महाराष्ट्र की वस्त्र परंपरा की पहचान माने जाने वाली येवला की पैठणी भी है। नाशिक की खेती की समृद्धि को काली किशमिश और काजू से दिखाया गया है। नाशिक की खान-पान परंपरा के प्रतीक के तौर पर चिवड़ा रखा गया है। इसके अलावा चुनिंदा मिठाइयां और सूखे मेवे भी इस भेंट सेट में हैं।
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