गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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मोतीलाल ओसवाल का अंदाज: सोने की तेजी रुकी है, खत्म नहीं हुई, गिरावट में थोड़ा-थोड़ा खरीदें

मोतीलाल ओसवाल का अंदाज: सोने की तेजी रुकी है, खत्म नहीं हुई, गिरावट में थोड़ा-थोड़ा खरीदें तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

मोतीलाल ओसवाल की नई रिपोर्ट के मुताबिक नजदीकी दौर में सोने पर दबाव रह सकता है, लेकिन लंबे दौर में यह मजबूत है। रिपोर्ट गिरावट पर किस्तों में खरीदारी की सलाह देती है।

मोतीलाल ओसवाल फायनेंशियल सर्विसेस ने सोने पर अपनी नई रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का नाम है "गोल्ड्स रैली : डिफर्ड, नॉट डीरेल्ड", यानी सोने की तेजी रुकी है, खत्म नहीं हुई। रिपोर्ट का कहना है कि नजदीकी वक्त में थोड़ी परेशानी रह सकती है, लेकिन लंबे वक्त के लिए सोना अब भी मजबूत है। भाव गिरे तो घबराकर बेचने की जगह थोड़ा-थोड़ा करके खरीदना चाहिए।

पिछले साल सोने ने सबको चौंका दिया था। मगर 2026 में सोना और चांदी, दोनों में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। जनवरी 2026 में सोना 5600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। तब लगा कि अब सोना रुकने वाला नहीं है। फिर अचानक भाव गिरा और 4000 डॉलर के नीचे चला गया। उसके बाद थोड़ा सुधार आया।

चांदी का हाल और भी तेज रहा। वह 100 डॉलर के पार चली गई थी, पर बाद में सोने से ज्यादा रफ्तार से नीचे आई। डॉलर के मुकाबले रुपया भी ऊपर-नीचे होता रहा, जिसका असर हमारे यहां के भाव पर भी पड़ा। 2025 में सोना बस ऊपर ही जा रहा था, जबकि 2026 में लगातार ऊपर-नीचे हो रहा है। इसकी वजहें हैं: अमेरिका में ब्याज दरों का सवाल, अब भी ऊंची महंगाई, बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न और दुनिया में जंग के हालात।

हमारे यहां दिवाली और धनतेरस सोने-चांदी की खरीद का बड़ा त्योहार है, और शादियों का सीजन भी इसी वक्त चलता है, इसलिए मांग बढ़ती है। 2016 की दिवाली पर सोना 30,000 रुपये पर था। 2026 की दिवाली पर वह करीब 1.50 लाख रुपये पर पहुंच गया है, यानी 10 साल में 5 गुना। आंकड़े बताते हैं कि दिवाली से पहले के 30 दिनों में सोने ने दिवाली के बाद के 30 दिनों से ज्यादा फायदा दिया है। पिछले साल दिवाली से पहले एक महीने में सोना 20% और चांदी 38% चढ़ी थी।

भाव ऊंचे होने के बावजूद लोगों का सोने पर भरोसा कम नहीं हुआ है। अगस्त और सितंबर में दुनियाभर के गोल्ड ETF में 187 टन सोना बढ़ा। कुल सोना 4,256 टन हो गया, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। भारत में भी सितंबर में गोल्ड ETF में 44.5 अरब रुपये आए, जो पिछले महीने से 71% ज्यादा है। सिल्वर ETF में भी 19.7 अरब रुपये आए। दूसरी तरफ भारत में सोने का आयात घटा। अगस्त में यह 2.3 अरब डॉलर था, सितंबर में 1.8 अरब डॉलर पर आ गया। वजह यह बताई गई है कि भाव ज्यादा है और सरकार ने भी आयात पर थोड़ी पाबंदी लगाई है।

मोतीलाल ओसवाल के रिसर्च हेड नवनीत दमानी का कहना है, "दुनिया में इतनी अनिश्चितता है, ऐसे में सोना सुरक्षित जगह है। लेकिन नजदीकी वक्त में भाव क्या रहेगा, यह अमेरिका के फेडरल रिजर्व, महंगाई, डॉलर और बॉन्ड पर निर्भर है। सितंबर में अमेरिका ने ब्याज दर 25 पॉइंट बढ़ाकर 3.75 से 4.00% कर दी, इससे थोड़ा दबाव आया है। फिर भी सेंट्रल बैंक सोना खरीद रहे हैं, इसलिए लंबे वक्त में सहारा है।" एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक चांदी में ज्यादा फायदा मिल सकता है, पर उसमें जोखिम भी ज्यादा है। उनका कहना है कि सोने में आई गिरावट खरीदारी का मौका है।

रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3,800 से 3,900 डॉलर का स्तर खरीदारी के लिए अच्छा है। नजदीकी वक्त में सोना 4,200 डॉलर और मध्यम वक्त में 4,500 से 4,700 डॉलर तक जा सकता है। हमारे यहां के भाव की बात करें तो डॉलर को 96 रुपये मानने पर 1,35,000 रुपये का स्तर खरीदारी के लिए अच्छा बताया गया है। नजदीकी वक्त में सोना 1,48,000 रुपये और मध्यम वक्त में 1,60,000 से 1,68,000 रुपये तक जा सकता है। रिपोर्ट की सलाह है कि तेजी के पीछे न दौड़ें, भाव गिरे तो शांति से थोड़ा-थोड़ा सोना लें। सोना पैसों की हिफाजत के लिए है, अमीर बनने के लिए नहीं, इसलिए पोर्टफोलियो में थोड़ा सोना हमेशा रखें।

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