मोदी बोले: जंगलों में नक्सलवाद खत्म हो रहा, अब विचारधारा वाले नक्सलियों की चुनौती
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छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक पार्टियों और संगठनों में वैचारिक नक्सली घुस गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद अब खत्म होने की ओर है, लेकिन वैचारिक नक्सलवाद की नई चुनौती सामने आ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई राजनीतिक पार्टियों और अलग-अलग संगठनों में वैचारिक नक्सलियों ने घुसपैठ कर ली है। मोदी के मुताबिक ये लोग आज भी नागरिकों को देश के संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने का काम कर रहे हैं।
मोदी छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों से बात कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई, जवानों की शहादत और नक्सल प्रभावित इलाकों में हुए विकास कामों का ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे वैचारिक नक्सलियों की पहचान करना, उन्हें खोजना और देश को सुरक्षित रखना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि नक्सलवाद और माओवादी आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं थी। उनके अनुसार एक वक्त देश के करीब 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे। बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत देश का बड़ा हिस्सा वामपंथी उग्रवाद की चपेट में था।
प्रधानमंत्री ने बताया कि हजारों गांवों के करोड़ों लोगों की जिंदगी इससे प्रभावित हुई थी। कई इलाकों में शाम होते ही जनजीवन थम जाता था। नक्सलियों के डर से लोगों के वोट देने के अधिकार पर भी असर पड़ा था। मोदी ने कहा कि एक साल में दो हजार तक नक्सली हमले होते थे।
मोदी ने 2010 में दंतेवाड़ा में हुई नक्सली हिंसा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस इलाके की जमीन वीर जवानों और बेगुनाह नागरिकों के खून से लाल हो गई थी। उनके मुताबिक उस साल नक्सलियों से मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए थे, और इसी जिले की एक और घटना में 44 बेगुनाह नागरिकों की हत्या कर दी गई थी।
उन्होंने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग रोज ऐसी घटनाएं हो रही थीं। मोदी ने यह भी बताया कि अकेले छत्तीसगढ़ में एक हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को जान गंवानी पड़ी।
2004 से 2013 के आंकड़ों का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि हर साल नक्सली हमलों में शहीद होने वाले जवानों की संख्या मारे जाने वाले नक्सलियों से ज्यादा थी। उन्होंने कहा कि नक्सली संगठनों के सरगना इस हालात को अपनी जीत मानकर जश्न मनाते थे।
मोदी के अनुसार 2014 में देश की जनता ने उन्हें सेवा का मौका दिया, उसके बाद नक्सलवाद के खिलाफ ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई गई। उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति और सोची-समझी रणनीति से हालात बदले गए।
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि पिछले एक साल में 47 साल बाद पहली बार ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का कोई जवान शहीद नहीं हुआ। उन्होंने इसे देश की सही नीतियों और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत बताया।
मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ अभियान के साथ सरकार ने प्रभावित इलाकों के विकास पर भी जोर दिया। इन इलाकों में 1,500 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई गईं और 9,500 से ज्यादा मोबाइल टावर लगाए गए। आदिवासी छात्रों की पढ़ाई के लिए करीब 200 एकलव्य स्कूल शुरू किए गए। नौजवानों को रोजगार के मौके देने के लिए लगभग 50 आईटीआई और 50 कौशल विकास केंद्र खोले गए। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि हजारों डाकघर, बैंक शाखाएं और एटीएम शुरू किए गए।
अति पिछड़े आदिवासी इलाकों के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना शुरू की गई। मोदी के मुताबिक इस योजना से दूर-दराज के गांवों तक पानी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गईं।
विश्व बैंक की हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मोदी ने दावा किया कि पिछले 12 साल में भारत के 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई के साथ गरीबी के खिलाफ लड़ाई में भी देश को बड़ी कामयाबी मिली है।
मोदी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया गया है और उनके पुनर्वास के लिए योजनाएं भी बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार राष्ट्र प्रथम की भावना से काम करती है, तो देश की शांति और सुरक्षा मजबूत होती है और गरीब व वंचित तबकों की विकास में हिस्सेदारी भी बढ़ती है।


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