माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 60,000 कर्मचारियों को दिया स्वैच्छिक रिटायरमेंट का ऑफर
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माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 60,000 कर्मचारियों को वॉलंटरी एक्ज़िट ऑफर दिया है, जो कंपनी के ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा है।
माइक्रोसॉफ्ट ने कुछ दिन पहले अपने करीब 60,000 कर्मचारियों को वॉलंटरी एग्ज़िट ऑफर दिया है। यह आंकड़ा कंपनी के कुल ग्लोबल वर्कफोर्स का करीब 27 प्रतिशत है। कंपनी ने किसी को नौकरी से निकाला नहीं है। उसने कर्मचारियों को एक आर्थिक पैकेज देकर अपनी मर्जी से रिटायरमेंट लेने का रास्ता खोल दिया है। माइक्रोसॉफ्ट एआई और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है और उसी के बीच अपना खर्च घटाने में लगी है।
वॉलंटरी एग्ज़िट का मतलब यह है कि कंपनी आपको निकाल नहीं रही, बल्कि खुद इस्तीफा देने का विकल्प सामने रख रही है। बदले में आर्थिक पैकेज मिलता है। यह लेऑफ से बिल्कुल अलग है, क्योंकि यहां फैसला कर्मचारी के हाथ में रहता है। माइक्रोसॉफ्ट की चीफ पीपल ऑफिसर एमी कोलमैन के मुताबिक यह उन कर्मचारियों के लिए एक नया विकल्प है जो कंपनी के बाहर अपने भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि बदलती जरूरतों के हिसाब से संस्थाएं अपना वर्कफोर्स बदल सकें, इसका यह एक और तरीका है।
पात्रता की बात करें तो यह ऑफर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के उन कर्मचारियों के लिए है जो लेवल 70 या उससे नीचे हैं। यानी वाइस प्रेसिडेंट स्तर तक के अधिकारी इसमें आते हैं। हालांकि कुछ विभाग इससे बाहर रखे गए हैं। इनमें मार्केटिंग, सेल्स और इंजीनियरिंग टीम के एक्सबॉक्स, विंडोज, कोपायलट, फाइनेंस और एचआर जैसे विभाग शामिल हैं।
पैकेज के बारे में रिपोर्ट के मुताबिक यह माइक्रोसॉफ्ट के स्टैंडर्ड सेवरेंस जैसा ही है। सेवा के हर पूरे साल के लिए एक महीने की बेसिक सैलरी मिलेगी। साथ में हेल्थ इंश्योरेंस और करियर-ट्रांजिशन सर्विसेज भी दी जाएंगी। कुछ मामलों में सेवरेंस पर कैप भी लगाई गई है। भारत के पात्र कर्मचारियों के पास फैसला लेने के लिए 1 दिसंबर 2026 तक का वक्त है, और भुगतान जनवरी 2027 में एक ही किस्त में किया जाएगा।
कंपनी यह क्यों कर रही है, इसका जवाब एआई और क्लाउड में भारी निवेश है। माइक्रोसॉफ्ट का आर्थिक वर्ष 2026 में, जो जून 2026 में खत्म हुआ, राजस्व 331.8 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल से 18% ज्यादा है। ऑपरेटिंग इनकम 155.2 बिलियन डॉलर रही। इसी के साथ एआई और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कंपनी का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट क्लाउड का राजस्व 27% बढ़कर 214.4 बिलियन डॉलर हुआ और एज़्योर का राजस्व 41% बढ़कर 100 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया।
इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए कंपनी को डेटा सेंटर, चिप और बिजली पर अरबों डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं। इस खर्च को संभालने के लिए वह वर्कफोर्स का खर्च घटाना चाहती है, और इसी वजह से यह ऑफर लाया गया है। जबरन कटौती के मुकाबले यह कम तकलीफदेह रास्ता है, लेकिन मकसद वही है कि सही लोग सही जगह रहें और बाकी खर्च कम हो।
सवाल यह भी उठता है कि क्या यह जबरन कटौती का ही दूसरा रूप है। कागज पर ऐसा नहीं है, पर व्यवहार में ऐसी गुंजाइश बनती है। माइक्रोसॉफ्ट ने साफ किया है कि यह ऐच्छिक है और किसी को निकाला नहीं जा रहा। फिर भी कंपनी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आगे वर्कफोर्स की जरूरतें कारोबारी प्राथमिकताओं से तय होंगी। कंपनी अपने वर्कफोर्स को संभालने के लिए जो कई तरीके अपनाती है, यह उनमें से एक है।
जिन्हें पहले से जाना था या जो बाहर मौका तलाश रहे हैं, उनके लिए यह राहत है। पर जो रुकना चाहते हैं, उनके लिए यह अनिश्चितता पैदा करता है। अगर कंपनी को खर्च घटाना है और खुद से पर्याप्त लोग नहीं गए, तो आगे जबरन कटौती का खतरा बना रहता है।
भारत में माइक्रोसॉफ्ट के करीब 23,000 कर्मचारी हैं, लेकिन इनमें से कितने इस ऑफर के पात्र हैं, यह कंपनी ने साफ नहीं किया है। भारत में कंपनी कोपायलट, एआई, विंडोज, एक्सबॉक्स, फाइनेंस और एचआर जैसे विभागों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देती है, इसलिए इनमें से कुछ पर इसका असर पड़ सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि वह भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने 2025 से 2029 के बीच क्लाउड और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्किलिंग और ऑपरेशंस के लिए 20.5 बिलियन डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। 2030 तक 2 करोड़ भारतीय युवाओं को एआई स्किल देने का लक्ष्य रखा गया है। यानी भारत में कंपनी के लिए टैलेंट अहम है, पर खर्च भी अहम है, और इन दोनों के बीच की खींचतान इस फैसले में दिखती है।
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