गुरूवार, 5 नवंबर 2026

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महाराष्ट्र में 100 ट्रेनिंग सेंटर को मंजूरी, 12 शुरू; लोढा बोले, कोई फीस नहीं लगेगी

PT24 नागपुर टीम

कौशल विकास विभाग की महात्मा ज्योतिबा फुले योजना के तहत 100 केंद्रों को मंजूरी मिली है। मंगलप्रभात लोढा ने 12 केंद्र शुरू किए, ये केंद्र सिर्फ 300 वर्ग फुट जगह में भी खुल सकेंगे।

राज्य के युवाओं को रोजगार लायक बनाने के लिए कौशल विकास विभाग ने 'महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल्य प्रशिक्षण केंद्र' योजना शुरू की है। गुरुवार को मेट्रो चौक के पास एल्फिन्स्टन टेक्निकल हाईस्कूल परिसर के दक्ष हॉल में इस योजना का ऑनलाइन उद्घाटन हुआ। कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने इसकी शुरुआत की।

योजना के तहत सिर्फ 300 वर्ग फुट जगह में भी कौशल प्रशिक्षण केंद्र खोलने की मंजूरी दी गई है। पहले चरण में प्रयोग के तौर पर राज्य के 100 केंद्रों को मंजूरी मिली है, जिनमें से 12 केंद्रों का उद्घाटन हो चुका है। सरकार चाहती है कि कौशल प्रशिक्षण हर गांव और हर बस्ती तक पहुंचे।

लोढा ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले कौशल्य प्रशिक्षण केंद्र देश में अपनी तरह की पहली पहल है। झुग्गी बस्तियों, दुर्गम और पहाड़ी इलाकों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और आदिवासी इलाकों के जरूरतमंद युवक-युवतियों को प्रशिक्षण की सुविधा देने के लिए सरकार ने यह अहम फैसला लिया है। प्रमोद महाजन कौशल्य विकास व उद्योजकता अभियान (PMKUVA) के तहत केंद्र खोलने के लिए जगह के नियमों में ढील दी गई है। अब कम से कम 300 से 1500 वर्ग फुट की जगह में भी केंद्र शुरू हो सकेगा।

12 केंद्र नागपुर, डहाणू-पालघर, नंदुरबार, यवतमाल, पुणे, मुंबई, सिंधुदुर्ग और जलगांव जिलों में खुले हैं। लोढा ने सोशल मीडिया पर जो जानकारी साझा की, उसमें आंबेगांव और देवगड का भी नाम है।

साल 2026 क्रांतिसूर्य महात्मा ज्योतिबा फुले की द्विशताब्दी जयंती का साल है। इसी मौके पर सरकार ने तय किया कि इस अभियान में बनने वाले सभी कौशल विकास केंद्रों का नाम महात्मा ज्योतिबा फुले के नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फुले की द्विशताब्दी जयंती पर उनके गांव में इस पहल का ऐलान किया था। लोढा के मुताबिक फुले के व्यावसायिक शिक्षा के विचारों के हिसाब से युवाओं को आज के बाजार की जरूरत का प्रशिक्षण देना, रोजगार के मौके दिलाना और उन्हें आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा करना इस फैसले का मुख्य मकसद है।

लोढा ने बताया कि पहले प्रशिक्षण केंद्रों के लिए बड़ी जगह की जरूरत होती थी। अब 300 वर्ग फुट में भी केंद्र खुल सकता है, इसलिए स्थानीय संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं को इसमें हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। मौजूद स्थानीय सुविधाओं का अच्छा इस्तेमाल करके प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाया जा सकेगा। झुग्गी बस्तियों, पुनर्वसन क्षेत्रों, दुर्गम और पहाड़ी भागों, नक्सल प्रभावित और आदिवासी इलाकों के साथ ग्रामीण युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

इन केंद्रों में उद्योगों की जरूरत के हिसाब से रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम चलेंगे। प्रशिक्षण, कौशल प्रमाणपत्र और रोजगार को आपस में जोड़ने पर जोर रहेगा, ताकि युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार के मौके मिलें। लोढा ने साफ कहा कि प्रशिक्षण लेने वाले उम्मीदवारों से कोई फीस नहीं ली जाएगी।

कार्यक्रम में कौशल विकास, रोजगार व उद्यमिता विभाग के आयुक्त डॉ. अमित सैनी, रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल्य विद्यापीठ की कुलगुरु डॉ. अपुर्वा पालकर, महाराष्ट्र राज्य नाविन्यता सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. श्रीकांत पाटील और व्यवसाय शिक्षण व प्रशिक्षण संचालनालय के संचालक सतीश सुर्यवंशी मौजूद थे।

सरकार का कहना है कि केंद्र नामी सामाजिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की भागीदारी से बनेंगे। इसका मकसद गांव और शहर के बीच प्रशिक्षण की सुविधा का फर्क घटाना और स्थानीय युवाओं को उनके इलाके में ही रोजगार दिलाना है।

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