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08:21 IST

महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों को इलाज के रेट साफ दिखने वाली जगह पर लगाने होंगे

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के 16 अक्टूबर के सरकारी आदेश के मुताबिक राज्य के सभी निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा संस्थाओं को सेवाओं की दरें प्रदर्शित करना अनिवार्य है।

महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों को इलाज के रेट साफ दिखने वाली जगह पर लगाने होंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र में अब सभी निजी अस्पतालों और दूसरे चिकित्सा प्रतिष्ठानों को अपनी सेवाओं और सुविधाओं के रेट ऐसी जगह लगाने होंगे, जहां मरीज आसानी से देख सकें। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने 16 अक्टूबर को जारी किए गए सरकारी आदेश (GR) में यह अनिवार्य किया है।

सरकारी आदेश के मुताबिक इससे मरीजों और उनके रिश्तेदारों को इलाज पर आने वाले संभावित खर्च का पहले से अंदाजा हो जाएगा और वे मेडिकल खर्च की योजना बना सकेंगे।

यह परिपत्र केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 12 अक्टूबर 2026 को दी गई सूचनाओं के आधार पर निकाला गया है। मुंबई नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम, 1949 के तहत रजिस्टर्ड निजी अस्पतालों और अन्य चिकित्सा प्रतिष्ठानों को महाराष्ट्र नर्सिंग होम नियम, 2021 की अनुसूची तीन में बताई गई सेवाओं और सुविधाओं के रेट प्रदर्शित करने होंगे। इन नियमों के हिसाब से क्लिनिकल और अस्पताल की सेवाओं के रेट सामने की जगह पर लगाना कानूनी तौर पर अनिवार्य है।

रेट लिस्ट मराठी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में होनी चाहिए। उसे अस्पताल परिसर में ऐसी अहम जगह पर लगाना होगा, जो साफ नजर आए और जहां आसानी से पहुंचा जा सके। अगर अस्पताल रेट में कोई बदलाव करता है, तो रेट लिस्ट को तुरंत अपडेट करना पड़ेगा।

बिलों को लेकर शिकायतें न हों, इसके लिए मरीजों को लागू सर्विस चार्ज और अलग-अलग पैकेज के रेट की पूरी जानकारी देनी होगी। रजिस्ट्रेशन काउंटर, पूछताछ काउंटर और बिलिंग काउंटर पर बैठे कर्मचारियों को मरीजों और उनके रिश्तेदारों को रेट लिस्ट और शुल्क के बारे में जरूरी जानकारी देनी होगी।

मेडिकल वीजा या आयुष वीजा पर भारत में इलाज के लिए आने वाले विदेशी मरीजों को सेवा देने वाले अस्पतालों को उनके लिए लागू खास पैकेज के रेट भी साफ तौर पर प्रदर्शित करने होंगे।

अस्पतालों की रजिस्ट्रेशन, नियमन और निगरानी करने वाले सक्षम प्राधिकरणों को रेट प्रदर्शन के नियमों के पालन की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी। नियम तोड़ने वाली संस्थाओं पर जरूरी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है।

सरकारी आदेश में यह भी लिखा है कि सभी जिला सर्जन, जिला स्वास्थ्य अधिकारी और नगर निगमों के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी यह परिपत्र अपने इलाके के निजी अस्पतालों और दूसरे चिकित्सा प्रतिष्ठानों के ध्यान में लाएं और उस पर असरदार अमल पक्का करें।

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