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09:13 IST

महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों को इलाज के रेट मराठी और अंग्रेजी में लगाने होंगे

सार्वजनिक आरोग्य विभाग ने शुक्रवार को सर्कुलर जारी कर निजी अस्पतालों में रेट लिस्ट साफ़ दिखने वाले तरीके से लगाना जरूरी किया है।

महाराष्ट्र के निजी अस्पतालों को इलाज के रेट मराठी और अंग्रेजी में लगाने होंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के निजी अस्पतालों के लिए नया आदेश निकाला है। इसके मुताबिक अस्पतालों को इलाज और बाकी मेडिकल सुविधाओं के रेट की सूची मराठी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में साफ दिखने वाली जगह पर लगानी होगी। निजी अस्पताल में इलाज कराने के बाद भारी-भरकम बिल के कारण आर्थिक संकट में फंसने वाले आम मरीजों के लिए इसे बड़ी राहत बताया गया है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2026 को इस बारे में सरकारी परिपत्र जारी किया। परिपत्र के मुताबिक अस्पताल के परिसर में मरीजों और उनके रिश्तेदारों को आसानी से दिखे और पढ़ने में आए, ऐसी जगह पर रेट लिस्ट लगाना जरूरी है। नियम तोड़ने वाले अस्पतालों पर प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

अब तक कई बार ऐसा होता रहा है कि निजी अस्पताल में इलाज के बाद मरीज के हाथ में बहुत ज्यादा रकम का बिल थमा दिया जाता है। इलाज, जांच, दवाइयों और दूसरी मेडिकल सुविधाओं की फीस के बारे में पहले पूरी जानकारी नहीं दी जाती, इसलिए मरीज और अस्पताल प्रशासन के बीच विवाद खड़े होते हैं। राज्य सरकार के इस फैसले से इलाज शुरू होने से पहले ही मरीजों को अलग-अलग सेवाओं के रेट पता चल जाएंगे। इससे संभावित खर्च का हिसाब लगाना आसान होगा। फीस में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों की संभावित आर्थिक ठगी टालने में मदद मिलेगी।

परिपत्र में महाराष्ट्र नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन नियमावली 2021 की अनुसूची 3 का हवाला है, जिसके तहत अस्पताल की मेडिकल सेवाओं और सुविधाओं के रेट दिखाना जरूरी है। यह नियम मुंबई शुश्रूषागृह पंजीकरण अधिनियम, 1949 के तहत रजिस्टर्ड निजी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों पर लागू है। रेट लिस्ट सिर्फ अंग्रेज़ी में रखना काफी नहीं होगा, उसे मराठी में भी देना होगा। इससे गांवों से या दूसरे जिलों से इलाज के लिए आने वाले मराठी भाषी मरीज भी फीस की जानकारी आसानी से समझ सकेंगे।

अगर अस्पताल इलाज या मेडिकल सेवाओं की फीस में बदलाव करते हैं, तो संशोधित रेट लिस्ट तुरंत लगाना होगा। पुरानी रेट लिस्ट दिखाकर असल बिल में अलग फीस वसूलने से जो उलझन पैदा होती है, उसे रोकने के लिए यह प्रावधान अहम माना गया है। मरीजों से ली जाने वाली फीस की साफ जानकारी मिले, यही इस फैसले का मुख्य मकसद है।

अस्पताल के रजिस्ट्रेशन काउंटर, पूछताछ काउंटर और बिलिंग काउंटर के कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीजों को सही जानकारी दें। मरीज या उनके रिश्तेदार इलाज की फीस, जांच के रेट या उपलब्ध ट्रीटमेंट पैकेज के बारे में पूछें, तो कर्मचारियों को उन्हें जरूरी मार्गदर्शन करना होगा। इससे इलाज के खर्च को लेकर गलतफहमियां कम होने की उम्मीद है।

परिपत्र में विदेशी मरीजों के लिए भी खास नियम है। महाराष्ट्र में इलाज के लिए बड़ी संख्या में विदेशी मरीज आते हैं। मेडिकल वीजा या आयुष वीजा पर भारत आने वाले विदेशी नागरिकों के लिए अस्पताल खास ट्रीटमेंट पैकेज उपलब्ध कराते हैं। सरकारी परिपत्र में कहा गया है कि ऐसे मरीजों के लिए लागू विशेष पैकेज के रेट भी अस्पतालों को साफ तौर पर दिखाने होंगे। इससे विदेशी मरीजों को भी इलाज का खर्च समझने में मदद मिलेगी।

रेट लिस्ट न लगाने, फीस की जानकारी छिपाने या रेट को लेकर अस्पष्टता रखने जैसी बातों पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। सरकारी निर्देशों का उल्लंघन करने वाले निजी अस्पतालों पर लागू कानूनों और नियमों के मुताबिक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस फैसले से निजी स्वास्थ्य सेवा में पारदर्शिता बढ़ेगी।

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