लॉ कोर्स में एडमिशन की ऊपरी उम्र सीमा हटी, बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
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बार कौन्सिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधि पाठ्यक्रमों में दाखिले की अधिकतम उम्र सीमा हटाने का प्रस्ताव 5 नवंबर को पास हो गया है। कोर्ट ने याचिका निपटा दी।
लॉ की पढ़ाई में दाखिला लेने के लिए तय अधिकतम उम्र की शर्त अब खत्म हो गई है। बार कौन्सिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने यह फैसला लिया है। बीसीआई ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस बारे में प्रस्ताव 5 नवंबर को मंजूर किया गया था। इससे कानून की पढ़ाई करने के इच्छुक विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यह जानकारी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति व्ही. मोहना की बेंच के सामने बीसीआई के वकीलों ने दी। बेंच ने यह बात रिकॉर्ड पर ली और इससे जुड़ी याचिका निपटा दी।
पुराने नियम क्या थे, यह भी समझ लेना जरूरी है। बीसीआई के 2008 के लीगल एजुकेशन नियमों के मुताबिक पांच साल के इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स के लिए खुली श्रेणी के उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 20 साल तय थी। आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को पांच साल की छूट मिलती थी। तीन साल के एलएलबी कोर्स के लिए अधिकतम उम्र 30 साल रखी गई थी, और इसमें भी आरक्षित श्रेणी को पांच साल की छूट थी।
उम्र सीमा को लेकर कई साल से अदालतों में लड़ाई चल रही थी। इस शर्त को बार-बार चुनौती दी गई। साल 2013 में बीसीआई ने अपने 2008 के नियमों से उम्र सीमा का प्रावधान वापस ले लिया था। तब समिति ने कहा था कि ये पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन करती हैं। लेकिन उसके बाद सितंबर 2016 के एक सर्कुलर के जरिए बीसीआई ने उम्र सीमा दोबारा लागू कर दी। इस फैसले को भी अलग-अलग अदालतों में चुनौती दी गई।
ताजा फैसले की पृष्ठभूमि सितंबर में हुई सुनवाई से जुड़ी है। उस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से कहा था कि वह पांच साल के इंटीग्रेटेड एलएलबी कोर्स की अधिकतम उम्र सीमा हटाने पर विचार करे। तब बीसीआई ने फैसला लेने के लिए वक्त मांगा था।
शुक्रवार की सुनवाई में बीसीआई ने साफ किया कि उम्र सीमा हटाने का प्रस्ताव 5 नवंबर को मंजूर हो चुका है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील जोहेब हुसेन पेश हुए। उन्होंने कहा कि पहले भी उम्र सीमा हटाई गई थी और बाद में फिर लागू कर दी गई। इसलिए उन्होंने अनुरोध किया कि इस बार मंजूर हुआ फैसला कोर्ट के आदेश में दर्ज किया जाए।
बीसीआई के वकीलों ने बताया कि प्रस्ताव अभी-अभी मंजूर हुआ है, इसलिए उसकी कॉपी अब तक दाखिल नहीं की जा सकी। कोर्ट ने बीसीआई का यह रुख दर्ज किया और याचिका का निपटारा कर दिया।
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