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लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट होगा सख्त, पास होने के लिए अब 75 फीसदी नंबर चाहिए

केंद्र सरकार ने मोटर वाहन नियमों में बदलाव का मसौदा जारी किया है। लर्निंग टेस्ट कड़ा होगा, कुछ सेवाएं ऑनलाइन और मुफ्त रहेंगी।

लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट होगा सख्त, पास होने के लिए अब 75 फीसदी नंबर चाहिए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का तरीका बदलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस प्रक्रिया में कई अहम बदलाव सुझाए हैं। इसके लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में सुधार का एक नया मसौदा जारी किया गया है। इन बदलावों से लर्निंग लाइसेंस का टेस्ट पहले से मुश्किल हो जाएगा, जबकि कुछ सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन और मुफ्त कर दी जाएंगी। सरकार का कहना है कि आम लोगों का सफर सुरक्षित रहे, इसीलिए यह सख्त कदम उठाया गया है।

प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक लर्निंग लाइसेंस की शुरुआती परीक्षा में पास होने के लिए जरूरी नंबर 60 फीसदी से सीधे 75 फीसदी कर दिए गए हैं। लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अब आवेदक को पहले की तरह 7 दिन नहीं, बल्कि कुल 15 दिन का वक्त मिलेगा। हर आवेदक को कम से कम 30 मिनट का सुरक्षित ड्राइविंग वाला ट्यूटोरियल भी पूरा करना होगा।

अर्जी देते वक्त उम्र, पहचान और पते के लिए अलग-अलग सबूत देने होंगे। इसके लिए वोटर आईडी, पासपोर्ट, ई-राशन कार्ड और सरकार के जारी किए कुछ खास पहचान पत्र माने जाएंगे। पते के सबूत के तौर पर पिछले 3 महीने के अंदर जारी हुआ बिजली बिल या घरेलू गैस की रसीद भी चल जाएगी। विदेशी नागरिकों को यह सबूत दिखाना होगा कि वे भारत में कानूनी तौर पर रह रहे हैं।

लाइसेंस का नवीनीकरण, डुप्लिकेट लाइसेंस, नाम या पता बदलना, निजी जानकारी अपडेट करना और गाड़ियों की श्रेणियां बढ़वाना, इन सब कामों के लिए एक नया 'फॉर्म 2A' लाने का प्रस्ताव रखा गया है। लाइसेंस पर नाम, पता या दूसरी एंट्री बदलवाने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

नए मसौदे में आवेदकों को अपनी सेहत के बारे में भी ज्यादा जानकारी देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि उन्हें मिर्गी (एपिलेप्सी) या दौरे पड़ने वाली कोई और बीमारी तो नहीं है, सुनने में दिक्कत तो नहीं है, रात में धुंधला दिखता तो नहीं (रतौंधी), किसी दवा से एलर्जी तो नहीं है और शरीर में कोई मेडिकल या सर्जिकल इम्प्लांट तो नहीं लगा है।

खास बात यह है कि जिन लोगों को मिर्गी या दौरों की शिकायत है और पिछले 3 साल में उन्हें ऐसा दौरा पड़ा है, या जो अभी मिर्गी की दवा ले रहे हैं, वे ड्राइविंग लाइसेंस के पात्र नहीं होंगे। नियम में साफ किया गया है कि दवा की एलर्जी और इम्प्लांट जैसी जानकारी सिर्फ तभी इस्तेमाल होगी, जब सड़क हादसे के बाद किसी को एम्बुलेंस में या अस्पताल में भर्ती किया जाए। इसके अलावा अर्जी के वक्त ब्लड ग्रुप और इमरजेंसी में संपर्क की डिटेल भी ली जाएगी।

यह नया मसौदा हाल ही में सरकार की ई-गजट वेबसाइट पर डाला गया है। केंद्र सरकार ने आम नागरिकों और दूसरे संबंधित पक्षों से अगले 30 दिन के अंदर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। उसके बाद इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा।

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