रविवार, 8 नवंबर 2026

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लक्ष्मीपूजन पर पूजा की शुरुआत से दीप जलाने तक पढ़े जाने वाले श्लोक

लक्ष्मीपूजन पर पूजा की शुरुआत से दीप जलाने तक पढ़े जाने वाले श्लोक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

दिवाली के लक्ष्मीपूजन में गणेश वंदना, लक्ष्मी ध्यान, समृद्धि और दीप के श्लोक पढ़े जाते हैं। श्री सूक्त, महालक्ष्मी अष्टक और कनकधारा स्तोत्र भी बताए गए हैं।

दिवाली के लक्ष्मीपूजन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है। बताया गया है कि इस दिन खास श्लोक और स्तोत्र पढ़ने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा आती है। पूजा की शुरुआत से लेकर उसके समापन तक पढ़े जाने वाले श्लोक इस तरह हैं।

किसी भी पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से करने की परंपरा है, ताकि पूजा में कोई विघ्न न आए। इसके लिए यह श्लोक पढ़ा जाता है:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।

इसका अर्थ है: हे टेढ़ी सूंड वाले, विशाल शरीर वाले और करोड़ों सूर्यों के तेज वाले गणपति बप्पा, मेरे सभी काम हमेशा बिना किसी बाधा के पूरे हों।

लक्ष्मीपूजन में माता लक्ष्मी का ध्यान करते समय यह प्रसिद्ध श्लोक पढ़ा जाता है:

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सूरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।

अर्थ: हे महामाये, देवलोक में पूजी जाने वाली और श्रीपीठ पर विराजमान देवी, आपके हाथों में शंख, चक्र और गदा है। हे महालक्ष्मी, आपको मेरा नमस्कार।

घर में धन-धान्य, सुख और वैभव बना रहे, इसके लिए इस मंत्र का जप बहुत फलदायी माना जाता है:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते।

अर्थ: हे सभी मंगलों में मंगल रूप, कल्याण करने वाली, सभी पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) सिद्ध करने वाली, शरण में आने वालों की रक्षा करने वाली और तीन नेत्रों वाली, हे नारायणी (लक्ष्मी), आपको मेरा नमस्कार।

घर की गरीबी और संकटों के नाश के लिए माता लक्ष्मी के इस रूप की प्रार्थना की जाती है:

पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि। विश्वप्रिये विष्णुमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि संनिधत्स्व।

अर्थ: हे कमल जैसे मुख वाली, कमल के पत्ते पर पानी की बूंद की तरह निष्पाप, कमल को पसंद करने वाली, कमल की पंखुड़ियों जैसी बड़ी आंखों वाली, संसार की प्रिय और भगवान विष्णु के मन के अनुरूप चलने वाली लक्ष्मी, आपके कमल जैसे पावन चरण मेरे हृदय और घर में हमेशा स्थिर रहें।

दिवाली दीयों का त्योहार है। लक्ष्मीपूजन के समय जलाया गया मुख्य दीया ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक होता है। दीया जलाते समय यह श्लोक पढ़ा जाए:

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते।

अर्थ: शुभ और कल्याण करने वाली, आरोग्य और धन-संपत्ति देने वाली और शत्रु की दुष्ट बुद्धि का नाश करने वाली दीये की ज्योति को मेरा नमस्कार।

दीप के लिए एक और श्लोक है:

दीपेन लोकान् जयति दीपेन हन्ति तामसम्। दीपो हरति पापानि दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते।

जो लोग सिर्फ श्लोक नहीं, पूरा स्तोत्र पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए लक्ष्मीपूजन के दिन तीन स्तोत्र बहुत पवित्र माने जाते हैं। श्री सूक्त (Sri Suktam) वेदों से लिया गया स्तोत्र है और लक्ष्मीपूजन के समय इसका पाठ सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। महालक्ष्मी अष्टक (Mahalakshmi Ashtakam) की शुरुआत "नमस्तेऽस्तु महामाये" से होती है और इसे पढ़ना आसान तथा बहुत प्रभावी बताया गया है। कनकधारा स्तोत्र (Kanakadhara Stotram) आदि शंकराचार्य का रचा हुआ है और धन की प्राप्ति के लिए खास माना जाता है।

पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखने को कहा गया है। लक्ष्मीपूजन के समय पूरी तरह स्नान करके और साफ कपड़े पहनकर ही श्लोक पढ़ने चाहिए। उच्चारण जितना हो सके साफ और शांत ढंग से किया जाए, जल्दबाजी में पाठ न किया जाए। मंत्रों और श्लोकों में चमत्कार से ज्यादा आपकी भक्ति माता लक्ष्मी को जल्दी प्रसन्न करती है।

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