दिल्ली में 'यमुनाकाठ' दिवाली विशेषांक का विमोचन, विजया रहाटकर ने सराही पहल
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राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने दिल्ली में 'यमुनाकाठ 2026' का विमोचन किया। अंक में मराठी भाषियों के अनुभव, लेख, इंटरव्यू और फोटो फीचर हैं।
नई दिल्ली में मराठी भाषा, साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई पहल "यमुनाकाठ" का दिवाली विशेषांक 'यमुनाकाठ 2026' राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर के हाथों जारी हुआ। राजधानी में हुए इस समारोह में उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में यह पहल सराहनीय है। उनके मुताबिक 'यमुनाकाठ' के जरिए राजधानी के मराठी समाज की सांस्कृतिक और वैचारिक झलक सामने आती है।
रहाटकर ने कहा कि इंसान कहीं भी चला जाए, उसे अपनी मिट्टी, भाषा और संस्कृति से जोड़े रखने वाले संस्कार अहम होते हैं। उन्होंने बताया कि गोदावरी के किनारे बीते बचपन की यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं। इन्हीं शब्दों में उन्होंने मराठी भाषा और संस्कृति से अपने रिश्ते को सामने रखा।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विजय नाईक, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव आनंद पाटील, महाराष्ट्र सदन की निवासी आयुक्त डॉ. श्वेता सिंघल, महाराष्ट्र सदन के सुशील गायकवाड, वरिष्ठ पत्रकार अभिजित कांबले, सांसद अमर काले और अंक की संपादक एडवोकेट प्राची गवांदे मौजूद थे। दिल्ली में रहने वाले मराठी अधिकारी, पत्रकार, प्रोफेसर, विद्यार्थी और कारोबारी भी पहुंचे। यह विशेषांक द समिधा इंडिया फाउंडेशन ने तैयार किया है। मकसद दिल्ली, देश के दूसरे हिस्सों और दुनिया के कुछ इलाकों के मराठी भाषियों की सांस्कृतिक दुनिया को मंच देना है।
विजय नाईक ने दिल्ली के मराठी समाज के सफर का जायजा लिया। वे पिछले 58 साल से दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि राजधानी में करीब चार लाख मराठी लोग रहते हैं। इतनी बड़ी तादाद के बावजूद भाषा और संस्कृति के कार्यक्रमों में ज्यादा लोगों की हिस्सेदारी की जरूरत है, ऐसा उन्होंने कहा। उनके मुताबिक 'यमुनाकाठ' जैसी पहल से मराठी लोगों को साथ आने और सांस्कृतिक रिश्ता मजबूत करने का मंच मिलता है।
आनंद पाटील ने भी इस पहल की तारीफ की। अभिजित कांबले ने मीडिया, भाषा और समाज के आपसी रिश्तों पर अपनी बात रखी। श्वेता सिंघल ने दिल्ली के मराठी समाज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को शुभकामनाएं दीं। सुशील गायकवाड ने भी शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि आगे ऐसे आयोजन होते रहेंगे। सांसद अमर काले ने 'यमुनाकाठ' को साकार करने वाले सभी को बधाई दी। अंक में उनका भी लेख शामिल है। उन्होंने वर्धा के पूर्व सांसद वसंत साठे और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर चुके दिवंगत एडवोकेट सिद्धार्थ शिंदे की यादें ताजा कीं।
संपादक प्राची गवांदे ने अंक के पीछे की सोच बताई। उनके मुताबिक अंक में दिल्ली, देश और कुछ हद तक दुनिया के मराठी समाज के अनुभव, विचार, साहित्य और सांस्कृतिक समझ को एक जगह लाने की कोशिश की गई है। इंटरव्यू, लेख, रिपोर्ताज और फोटो फीचर के साथ साहित्य, राजनीति, प्रशासन, मीडिया, कानून, नीति निर्माण, शोध, लेखन, समाजसेवा, फोटोग्राफी और मूर्तिकला जैसे क्षेत्रों के जाने-माने लोग इसमें हैं। पहले प्रयास में शामिल सभी लेखकों और सहयोग करने वालों का उन्होंने आभार माना। खास मदद के लिए दिल्ली के पत्रकार प्रशांत वाघाये, नामदेव काटकर, अजिंक्य बनसोडे, ऋषी मोरे, लेशपाल जवलगे और रुपेश माने का भी शुक्रिया अदा किया। प्रस्तावना प्राची गवांदे ने रखी, संचालन प्रशांत वाघाये ने किया और आभार नामदेव काटकर ने माना।
अंक में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, वरिष्ठ पत्रकार विजय नाईक और पूर्व केंद्रीय इस्पात सचिव अरुणा लिमये के इंटरव्यू हैं। विजया रहाटकर, केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे, सांसद श्रीकांत शिंदे, अमर काले, राजाभाऊ वाजे, प्रशासनिक अधिकारी सुशील गायकवाड, श्वेता सिंघल, सुप्रिया देवस्थल और प्रतिभा पारकर के लेख हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुरेश भटेवरा, विजय चोरमारे, सागर कुलकर्णी और उमेश कुमार के लेख भी शामिल हैं। आशय गुणे और प्रमोद जगताप के खास रिपोर्ताज हैं। मूर्तिकार अनिल सुतार और अधिकारी व उम्दा फोटोग्राफर पदमसिंह पाटील के फोटो फीचर भी अंक में हैं।
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