शनिवार, 7 नवंबर 2026

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नरक चतुर्दशी और लक्ष्मीपूजन में क्या फर्क है, दिवाली के इन दो दिनों की अहमियत

नरक चतुर्दशी और लक्ष्मीपूजन में क्या फर्क है, दिवाली के इन दो दिनों की अहमियत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कल्चर PT24 टीम

दिवाली के हर दिन का अपना धार्मिक महत्व है। नरक चतुर्दशी पर सुबह अभ्यंगस्नान होता है, तो लक्ष्मीपूजन की पूजा शाम को की जाती है।

दिवाली के हर दिन का अपना अलग धार्मिक महत्व माना जाता है। इनमें नरक चतुर्दशी और लक्ष्मीपूजन, ये दो दिन खास अहमियत वाले गिने जाते हैं। नरक चतुर्दशी की सुबह जल्दी अभ्यंगस्नान किया जाता है, जबकि लक्ष्मीपूजन के दिन शाम को देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। दोनों दिनों का धार्मिक मकसद और पौराणिक संदर्भ एक-दूसरे से अलग हैं।

पहले नरक चतुर्दशी की बात करें। अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन को छोटी दिवाली भी कहते हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया और उसकी कैद में पड़ी कई स्त्रियों को छुड़ाया। नरकासुर के अत्याचार से मुक्ति मिलने की खुशी में यह दिन मनाया जाता है।

महाराष्ट्र में नरक चतुर्दशी की सुबह अभ्यंगस्नान की खास परंपरा है। सूर्योदय से पहले उठकर खुशबूदार तेल और उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। इसके बाद नए कपड़े पहने जाते हैं और इसी के साथ दिन की शुरुआत होती है।

अब लक्ष्मीपूजन की बात। यह दिवाली के सबसे अहम दिनों में से एक है। कार्तिक महीने की अमावस्या को कई परिवारों में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। प्रार्थना की जाती है कि घर में सुख, समृद्धि, धनधान्य और आनंद बना रहे। व्यापारी वर्ग में इस दिन नए हिसाब-किताब की पूजा करने की परंपरा है।

इस दिन घर की साफ-सफाई कर रंगोली बनाई जाती है और दिए जलाए जाते हैं। शुभ मुहूर्त पर शाम को लक्ष्मीपूजन किया जाता है। लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर का पूरा परिसर दियों से रोशन करने की प्रथा है।

दोनों दिनों का फर्क यूं समझा जा सकता है। नरक चतुर्दशी का रिश्ता मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर जीत और अभ्यंगस्नान की परंपरा से जुड़ा है। लक्ष्मीपूजन का मुख्य मकसद माता लक्ष्मी की पूजा करके घर में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करना है। नरक चतुर्दशी पर सुबह के अभ्यंगस्नान को अहमियत दी जाती है, तो लक्ष्मीपूजन के दिन शाम की पूजा और दीप जलाने को।

दोनों दिन दिवाली की खुशी को और बढ़ाते हैं। साथ ही यह संदेश देते हैं कि जीवन में रोशनी, सकारात्मकता और आनंद बना रहे।

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