कोयना नदी में घटा पानी, पाटण तालुका में पानी की किल्लत का डर, किसान परेशान
पाटण तालुका में बारिश आखिरी दौर में रुक गई। खरीफ को नुकसान हुआ है और अब कोयना नदी का पानी भी तेजी से घट रहा है।
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मल्हारपेठ: पाटण तालुका में इस साल बारिश आखिरी दौर में रुक गई, जिससे खरीफ सीजन को बड़ा झटका लगा है। अब कोयना नदी में निसरे बांध के पास का पानी भी तेजी से कम होता दिख रहा है। कई जगह नदी का पात्र खुला पड़ने लगा है और पानी की कमी साफ महसूस होने लगी है। आने वाले दिनों में पानी की किल्लत और गंभीर होने की आशंका है, इसलिए किसान चिंता में हैं। पीने के पानी को प्राथमिकता देना जरूरी है, ऐसे में खेती की सिंचाई के लिए पानी कहां से आएगा, यह सवाल किसानों के सामने खड़ा है।
पाटण तालुका के पश्चिमी हिस्से की खेती बड़े पैमाने पर बारिश पर निर्भर है। कोयना नदी और आसपास के जलस्रोतों के सहारे चलने वाले गांवों में भी बारिश ने मुंह मोड़ लिया, इसलिए अब पानी का हिसाब-किताब बैठाने की नौबत आ गई है। खरीफ के आखिर में बारिश रुकने से दलहन, अनाज और दूसरी फसलों की बढ़त पर बुरा असर पड़ा है। कुछ इलाकों में फसलें सूखने का डर है। किसान पहले से ही पैसों की तंगी झेल रहे हैं और अब नदी का पानी घटने से आने वाले रबी सीजन और गर्मी की खेती के पानी का सवाल भी गंभीर होता दिख रहा है।
कोयना बांध के उपलब्ध पानी का इस्तेमाल पीने, खेती और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए होता है। लेकिन जब पानी की उपलब्धता सीमित होने लगे, तो पीने के पानी को प्राथमिकता देकर बंटवारे की योजना बनानी पड़ती है। बांध से पीने के लिए पानी छोड़ने की मांग उठ रही है। इसी बीच खेती की सिंचाई के लिए मिलने वाले पानी पर रोक लगने की संभावना किसानों को सता रही है।
अगर खेती को समय पर पानी नहीं मिला, तो खड़ी फसलों का नुकसान तो होगा ही, अगले सीजन का आर्थिक गणित भी बिगड़ सकता है। बारिश की कमी से पहले ही मुश्किल में फंसे किसानों के लिए सिंचाई का मसला और बड़ा सिरदर्द बन सकता है। इसलिए पीने के पानी की जरूरत और खेती के लिए चाहिए पानी, दोनों में संतुलन रखकर योजना बनाने की मांग हो रही है।
बारिश का मौसम खत्म होने के बाद नदी, नाले, धाराओं और कुओं का पानी धीरे-धीरे कम होता जाता है। इस साल बारिश आखिरी दौर में रुक गई, इसलिए इसका असर ज्यादा तेज महसूस होने की आशंका है। कोयना नदी का पानी घटने से नदी किनारे के गांवों की खेती, पानी सप्लाई योजनाओं और रोजमर्रा की दूसरी जरूरतों को लेकर चिंता जताई जा रही है।
मौजूदा हालात को देखते हुए पानी का किफायत से इस्तेमाल करना जरूरी होगा। पीने के पानी की बर्बादी रोकने के साथ खेती के लिए उपलब्ध पानी का सोच-समझकर इस्तेमाल भी जरूरी है। पानी की उपलब्धता और संभावित मांग का जायजा लेकर प्रशासन अगर वक्त रहते कदम उठाए, तो आगे की दिक्कतों की तीव्रता कम की जा सकती है।
पाटण तालुका के किसानों के सामने खरीफ फसलों का नुकसान, बढ़ता खेती का खर्च और आने वाले दिनों की पानी की किल्लत जैसी चुनौतियां खड़ी हैं। ऐसे में उपलब्ध जल भंडार की सही योजना बनाकर खेती के लिए चाहिए पानी पर साफ नीति तय करने की जरूरत है। नदी का जलस्तर, बांध में मौजूद भंडार और पीने के पानी की आगे की जरूरत को देखकर संबंधित विभागों का मिलकर फैसला लेना अहम होगा।
पानी की किल्लत और गंभीर होने से पहले संभावित किल्लत वाले गांवों का जायजा लेना, पानी सप्लाई योजनाओं की हालत जांचना और पानी के किफायती इस्तेमाल को लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है। साथ ही किसानों को यह साफ जानकारी मिलना भी अहम है कि सिंचाई के लिए कितना पानी और किस अवधि में मिल सकता है। कुल मिलाकर, कोयना नदी का घटता पानी पाटण तालुका के लिए आने वाली पानी की किल्लत की चेतावनी माना जा रहा है। बारिश की कमी और सिंचाई के पानी की अनिश्चितता से किसान पहले ही परेशान हैं। अब पानी की सही योजना, किफायती इस्तेमाल और समय पर प्रशासनिक कदमों पर ही आगे की किल्लत की तीव्रता निर्भर करेगी।
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