कीर्तिकर: ठाकरे गुट में नहीं लौटूंगा, पर शिंदे से मुलाकात न होने से नाराज हूं
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद गजानन कीर्तिकर ने पार्टी के कामकाज पर नाराजगी जताई है, लेकिन ठाकरे गुट में जाने की चर्चाओं को खारिज किया है।
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पार्टी के अंदर की नाराजगी का मुद्दा चर्चा में है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद गजानन कीर्तिकर ने पार्टी के कामकाज के तरीके पर नाराजगी जाहिर की है।
कीर्तिकर ने बताया कि पार्टी प्रमुख से संपर्क नहीं हो पाता। इसी वजह से आम लोगों के काम निपटाने में दिक्कतें आ रही हैं। उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि वे फिर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना में जा सकते हैं। हालांकि इन चर्चाओं पर उन्होंने खुद सफाई दी है।
कीर्तिकर शिवसेना के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनके बेटे अमोल कीर्तिकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना में सक्रिय हैं। इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में बात उठने लगी थी कि गजानन कीर्तिकर भी ठाकरे गुट में लौट सकते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए साफ कहा कि वे पार्टी बदलने वाले नहीं हैं।
अपनी राजनीतिक भूमिका पर बोलते हुए कीर्तिकर ने कहा कि वे एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ ही हैं। उनके मुताबिक पार्टी की कुछ बातों को लेकर नाराजगी जरूर है, लेकिन पार्टी छोड़ने का कोई फैसला उन्होंने नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि वे घरवापसी नहीं करेंगे और पार्टी नहीं बदलेंगे। नाराजगी की वजह उन्होंने यह बताई कि पार्टी प्रमुख की तरफ से जैसा जवाब मिलना चाहिए, वैसा नहीं मिल रहा।
नाराजगी का कारण समझाते हुए कीर्तिकर ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के नाते कई लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास आते हैं। जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ है, उन्हें सरकार से न्याय दिलाने के लिए पार्टी प्रमुख से बात करना जरूरी होता है। उनका कहना है कि एकनाथ शिंदे से मुलाकात नहीं मिल पा रही, इसलिए इन कामों में रुकावट आ रही है। कीर्तिकर ने यह भी कहा कि उन्हें किसी पद की उम्मीद नहीं है, बस इतना चाहते हैं कि पार्टी से सही जवाब मिले।
कीर्तिकर ने उद्धव ठाकरे के दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे जब पार्टी प्रमुख थे, तब भी उन्हें नाराजगी थी और अब भी हालात लगभग वैसे ही हैं। उनके इस बयान की राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है।
कीर्तिकर के बयान से शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में आपसी संवाद का मुद्दा सामने आया है। वरिष्ठ नेता ने ही शिकायत की है कि उन्हें पार्टी प्रमुख से मिलने का मौका नहीं मिल रहा, इसलिए राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। लेकिन कीर्तिकर ने साफ कर दिया है कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे, इसलिए उनके ठाकरे गुट में जाने की चर्चाओं का फिलहाल कोई आधिकारिक आधार नहीं है। अब नजर इस पर है कि कीर्तिकर की नाराजगी पर एकनाथ शिंदे या शिवसेना के दूसरे नेता क्या प्रतिक्रिया देते हैं।