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21:14 IST

खैबर पख्तूनख्वा भेजे जाने के आदेश पर पंजाब पुलिस में बगावत, मुनीर और शहबाज पर दबाव

खैबर पख्तूनख्वा में 40,000 पंजाब पुलिसकर्मियों को तैनात करने की योजना के खिलाफ पुलिस बल के भीतर नाराजगी, वरिष्ठों के आदेश मानने से इनकार की बात सामने आई है।

खैबर पख्तूनख्वा भेजे जाने के आदेश पर पंजाब पुलिस में बगावत, मुनीर और शहबाज पर दबाव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पाकिस्तान की सियासत इस वक्त बेहद विस्फोटक और अनिश्चित मोड़ पर पहुंच गई है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को राजनीतिक रूप से पूरी तरह खत्म करने और उनका गढ़ तोड़ने के लिए सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बेहद सख्त कदम उठाने शुरू किए हैं। लेकिन रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय में तैयार हुआ यह मास्टरप्लान अब खुद सरकार पर भारी पड़ता दिख रहा है।

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की इकलौती प्रांतीय सरकार खैबर पख्तूनख्वा में है। वहां सरकार को निलंबित कर 40,000 पंजाब पुलिसकर्मियों को तैनात करने का फैसला लिया गया था। मगर जिन पुलिसवालों के भरोसे सरकार यह सख्ती करना चाहती थी, उसी पंजाब पुलिस ने वरिष्ठों के आदेश मानने से खुलकर इनकार कर बगावत का झंडा उठा लिया है।

इस पूरे सियासी नाटक की शुरुआत तब हुई, जब खैबर पख्तूनख्वा के प्रमुख सोहेल अफरीदी ने इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से छुड़ाने के लिए पूरे देश से लाखों समर्थकों का बड़ा मार्च निकालने का ऐलान किया। इस मार्च के डर से सेना प्रमुख आसिम मुनीर के सीधे दबाव में प्रांतीय सरकार को तुरंत निलंबित कर दिया गया। सोहेल अफरीदी समेत कई अहम प्रांतीय नेताओं को रातोंरात गिरफ्तार कर अनिश्चित काल के लिए जेल में डाल दिया गया। इमरान खान की लोकप्रियता और उनकी पार्टी की संगठनात्मक ताकत से घबराई शहबाज-मुनीर जोड़ी ने खैबर पर सैन्य छावनी जैसा नियंत्रण पाने की कोशिश की।

अब सवाल यह कि खैबर पख्तूनख्वा में पंजाब पुलिस को ही क्यों भेजा जा रहा है। 2024 में पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में सेना की पूरी मशीनरी और शहबाज शरीफ की मुस्लिम लीग (PML-N) साथ आने के बावजूद खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की लहर के आगे बेअसर रहे। यही अकेला ऐसा प्रांत था, जहां तमाम अड़चनों को पार करके PTI ने अपनी सरकार बनाई। शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख को डर है कि खैबर के स्थानीय पुलिस अफसर और प्रशासन इमरान खान के वफादार हैं, इसलिए वे इमरान समर्थकों पर कोई कड़ी कार्रवाई या फायरिंग नहीं करेंगे।

इसी वजह से पंजाब प्रांत से, जहां शहबाज शरीफ की भतीजी मरियम नवाज मुख्यमंत्री हैं, करीब 40,000 पुलिसकर्मियों की सैन्य टुकड़ी जैसी खेप खैबर भेजने की योजना बनाई गई। सरकार का इरादा था कि पंजाब पुलिस को इमरान समर्थकों का आंदोलन दबाने और विरोधियों को शांत करने के हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाए। लेकिन पंजाब पुलिस के भीतर के गुस्से की वजह से शहबाज और मरियम नवाज का यह दांव फेल होता दिख रहा है।

रावलपिंडी और लाहौर के वरिष्ठ सूत्रों की जानकारी के मुताबिक पंजाब पुलिस में यह बगावत एक रात में पैदा नहीं हुई। इससे पहले इमरान खान के PTI समर्थकों के विरोध-प्रदर्शन को काबू करने के लिए जिन पुलिसकर्मियों को अलग-अलग सीमावर्ती इलाकों में तैनात किया गया था, उन्हें बेहद अमानवीय हालात का सामना करना पड़ा। कड़ी धूप में और दूर-दराज के इलाकों में सीमा पर तैनात इन पुलिसवालों को रहने के लिए ठीक-ठाक ठिकाना नहीं दिया गया और पीने का साफ पानी भी मुहैया नहीं कराया गया।

सूत्रों के मुताबिक सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन पुलिसकर्मियों को बासी और खराब खाना खाने पर मजबूर किया गया। इस घटिया खाने से फूड पॉइजनिंग हुई और वक्त पर इलाज न मिलने की वजह से पंजाब पुलिस के पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। अपने ही साथियों का ऐसा अंत देखकर पुलिस बल में भारी गुस्सा फैल गया। अब जब उन्हें एक बार फिर खैबर के दुर्गम और खतरनाक इलाकों में 40,000 पुलिसकर्मियों की टुकड़ी के साथ भेजने के आदेश आए, तो निचले स्तर के कर्मचारियों और अफसरों ने साफ कहा, "जो सरकार हमारी जान और सेहत की जरा भी परवाह नहीं करती, उस सरकार के सियासी स्वार्थ के लिए हम सैनिकों की तरह कुर्बान नहीं होंगे।"

पंजाब पुलिस के कर्मचारियों ने वरिष्ठ मुख्यालय से आने वाले किसी भी नए तैनाती आदेश को मानने में खुलकर असमर्थता जताई है। पुलिस का कहना है कि प्रांतीय या केंद्र सरकार अपने सियासी फायदे के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल सेना की तरह कर रही है और उन्हें जनता के खिलाफ खड़ा कर रही है। एक तरफ खैबर की जनता इमरान खान के पीछे मजबूती से खड़ी है, तो दूसरी तरफ पंजाब पुलिस को वहां भेजकर दो प्रांतों के बीच सीधा टकराव भड़काने की कोशिश की जा रही है।

पंजाब पुलिस के महानिदेशक (IGP) ने मीडिया से बात करते हुए हालात संभालने की कोशिश की। उन्होंने सफाई दी कि 40,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती का अंतिम फैसला अभी औपचारिक रूप से नहीं हुआ है और जब भी ऐसा कोई फैसला होगा, तब पुलिस बल की सभी मांगों और उनकी सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके बावजूद रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय में इस बगावत से बड़ी बेचैनी फैली है। अगर कानून-व्यवस्था संभालने वाला तंत्र ही आदेश मानने से इनकार करने लगे, तो आने वाले दिनों में पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात को रोकना सेना प्रमुख आसिम मुनीर के लिए नामुमकिन-सा हो जाएगा।

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