मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:00 IST

इम्रान खान की रिहाई के लिए PTI का इस्लामाबाद की ओर लाँग मार्च, बात रही बेनतीजा

खैबर पख्तुनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल आफ्रिदी की अगुवाई में PTI का काफिला इस्लामाबाद की ओर रवाना, सरकार ने रास्ते सील किए।

इम्रान खान की रिहाई के लिए PTI का इस्लामाबाद की ओर लाँग मार्च, बात रही बेनतीजा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

पाकिस्तान में सियासी तनाव अब बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (PTI) के संस्थापक इम्रान खान की रिहाई की मांग को लेकर पार्टी ने केंद्र सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। सरकार के साथ बातचीत का दूसरा दौर बेनतीजा रहने के बाद खैबर पख्तुनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल आफ्रिदी और प्रांतीय अध्यक्ष जुनैद अकबर खान की अगुवाई में लाखों समर्थकों का काफिला राजधानी इस्लामाबाद की ओर निकल पड़ा है। यह मोर्चा रविवार दोपहर लक्की मारवत के गांधी चौक से रवाना हुआ।

इस लाँग मार्च में टैंक, डेरा इस्माईल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और करक इलाकों के हजारों समर्थक और प्रांतीय नेता शामिल हैं। मुख्यमंत्री सोहेल आफ्रिदी ने साफ किया है कि काफिला 8 अक्टूबर तक खैराबाद पहुंचेगा और वहीं से आंदोलन की आगे की रणनीति का ऐलान होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उम्मीद जताई है कि स्वाबी और करक पहुंचते-पहुंचते मोर्चे में लाखों लोग जुड़ जाएंगे।

तनाव कम करने और सड़क पर आंदोलन टालने के लिए PTI की बातचीत कमेटी शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंची थी। सरकार और PTI के बीच दो दिन तक बंद कमरे में बैठकें हुईं, लेकिन कोई ठोस फैसला हुए बिना रविवार तड़के ये बैठकें खत्म हो गईं।

PTI ने सरकार के सामने कुछ मुख्य मांगें रखी थीं। पहली, अदियाला जेल में बंद 73 साल के इम्रान खान को उनके निजी डॉक्टरों से सही जांच और इलाज का मौका मिले। दूसरी, सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश के मुताबिक नजर की दिक्कत की वजह से उन्हें इस्लामाबाद के प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया जाए। तीसरी, आंदोलन से पहले गिरफ्तार किए गए इम्रान खान की बहनों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं को फौरन रिहा किया जाए। चौथी, उनकी पत्नी बुशरा बीबी की सही मेडिकल जांच हो और उनके खिलाफ चल रहे मामलों की निष्पक्ष सुनवाई हो।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है और इम्रान खान को बाहर शिफ्ट करने से इनकार कर दिया है। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों की बातचीत पूरी तरह टूट गई।

लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सोहेल आफ्रिदी ने केंद्र सरकार और देश की ताकतवर व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "पिछले 79 साल से जो मानसिकता देश पर थोपी गई है, वही मानसिकता अब बंद कमरे में फैसले लेकर खैबर पख्तुनख्वा की जनता पर सैन्य कार्रवाई थोपने की कोशिश कर रही है। लेकिन हमारी सरकार पश्तून समाज के हित के खिलाफ कोई भी फैसला कबूल नहीं करेगी।"

आफ्रिदी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की दिलचस्पी प्रांत में अमन कायम करने में नहीं है, वह सिर्फ PTI को खत्म करना चाहती है। उनका दावा है कि प्रांतीय सरकार ने 100 दिन में शांति कायम करने की साफ नीति दी थी, फिर भी केंद्र सरकार सैन्य आक्रामकता का रास्ता चुन रही है। उन्होंने खैबर पख्तुनख्वा में गवर्नर राज या इमरजेंसी लगाने की सभी संभावनाओं को भी खारिज कर दिया।

दूसरी तरफ शहबाज शरीफ सरकार और गृह मंत्रालय ने मोर्चे से निपटने की पूरी तैयारी की है। इस्लामाबाद आने वाले सभी मुख्य हाईवे, फ्लाईओवर और एंट्री पॉइंट पर बड़े-बड़े धातु के शिपिंग कंटेनर रखकर रास्ते पूरी तरह सील कर दिए गए हैं। राजधानी में धारा 144 लागू है और अतिरिक्त पुलिस बल व अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां तैनात की गई हैं।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्ला ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है कि उन्हें किसी भी हाल में इस्लामाबाद में दाखिल नहीं होने दिया जाएगा। गृह मंत्री मोहसिन नक्वी ने लाहौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे मुख्यमंत्री सोहेल आफ्रिदी को निशाने पर लिया। नक्वी ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान हिंसा में किसी की जान गई तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ सोहेल आफ्रिदी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बातचीत की नाकामी की पुष्टि करते हुए आफ्रिदी पर बातचीत को "सबोटाज" करने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार PTI को "गड़बड़ी फैलाने" नहीं देगी। नक्वी ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 14 सितंबर के आदेश का भी हवाला दिया, जिसके मुताबिक किसी भी सियासी पार्टी या उसकी लीडरशिप को इस्लामाबाद में सार्वजनिक सड़कों, हाईवे, इंटरचेंज, टोल प्लाजा और इमारतों पर कब्जा करने का "कानूनी हक" नहीं है।

इम्रान खान अगस्त 2023 से 100 से ज्यादा मामलों के आरोप में जेल में हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि उनके समर्थन में उठा यह आंदोलन पूरे पाकिस्तान को अपनी चपेट में लेता है या सरकार इस मोर्चे को रोकने में कामयाब होती है।

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