4 अक्टूबर को इस्लामाबाद कूच का ऐलान, खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल पर केंद्र में मंथन
इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने इस्लामाबाद की ओर मार्च का ऐलान किया है। शहबाज शरीफ सरकार खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल या गवर्नर राज पर विचार कर रही है।
पाकिस्तान की सियासत में इन दिनों काफी हलचल है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इन्साफ (पीटीआई) ने 4 अक्टूबर को राजधानी इस्लामाबाद की ओर बड़ा मार्च निकालने का आधिकारिक ऐलान किया है। इस आंदोलन के दबाव में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और सत्ताधारी गठबंधन में बेचैनी है।
इसी बीच पीटीआई की हुकूमत वाले सूबे खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में आपातकाल या गवर्नर राज लागू करने को लेकर केंद्र के स्तर पर तेजी से बातचीत चल रही है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के वरिष्ठ नेताओं के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। हालात की गंभीरता देखते हुए शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी के साथ फौरन बैठकें रखी हैं।
सरकार की ओर से कहा गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में अनुच्छेद 232 के तहत आपातकाल पर विचार सियासी बदले की वजह से नहीं हो रहा। सरकार के मुताबिक इसकी वजह सूबे में लगातार बढ़ती दहशतगर्दी की वारदातें और प्रशासनिक नाकामी है। कानून मंत्री आजम नजीर तरार के मुताबिक अगर कोई सूबाई सरकार अपनी संवैधानिक और सुरक्षा की जिम्मेदारियां निभाने में नाकाम रहे, तो वहां संवैधानिक कदम उठाना केंद्र सरकार का फर्ज बनता है।
संसद में पीएमएल-एन और पीपीपी के प्रमुख नेताओं की अहम बैठक हुई। पीपीपी की नेता शेरी रहमान और सैयद नवीद कमर ने खैबर पख्तूनख्वा के हालात पर फिक्र जताई। पीपीपी के वरिष्ठ नेता नय्यर बुखारी ने कहा कि आगे के कदम कानून और संविधान के दायरे में रहकर ही उठाए जाएंगे। उन्होंने पीटीआई पर आरोप लगाया कि वह सूबे की जनता के असल मसले और बढ़ती दहशतगर्दी हल करने के बजाय सिर्फ एक शख्स, यानी इमरान खान, को जेल से छुड़ाने के एजेंडे पर काम कर रही है।
पीपीपी ने हमेशा की तरह सियासी बातचीत पर ज्यादा जोर दिया है और टकराव से बचने की सलाह दी है। फिर भी ऐसे संकेत दिए गए हैं कि अगर खैबर पख्तूनख्वा में कानून-व्यवस्था हाथ से निकल गई, तो गवर्नर राज के विकल्प को पार्टी का अंदरखाने समर्थन हो सकता है।
उधर 4 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पूरा इस्लामाबाद छावनी जैसा बन गया है। सूत्रों के मुताबिक अकेले इस्लामाबाद और आसपास के इलाकों में 22,000 से ज्यादा पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात हैं। इनकी निगरानी के लिए 8 डीआईजी, 10 एसएसपी, 40 एसपी और 58 डीएसपी लगाए गए हैं। खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब को जोड़ने वाले संवेदनशील अटक जिले में 30,000 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। यानी कुल 50,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राजधानी के आसपास लगे हैं। शहर के बड़े हाईवे, फ्लाईओवर और एंट्री पॉइंट पर 1,500 से ज्यादा बड़े लोहे के कंटेनर खड़े करके सड़कें पूरी तरह सील कर दी गई हैं।
केंद्र सरकार के रुख पर पीटीआई नेताओं ने सख्त चेतावनी दी है। पीटीआई की ओर से कहा गया है कि अगर खैबर पख्तूनख्वा में जबरदस्ती गवर्नर राज या आपातकाल लगाया गया, तो उसके गंभीर और तीखे सियासी नतीजे पूरे देश को भुगतने पड़ेंगे। सियासी तनाव घटाने के लिए प्रधानमंत्री शरीफ विपक्ष के नेता महमूद खान अचकजई से भी संपर्क करने की तैयारी में हैं।
इस वक्त शहबाज शरीफ सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। एक तरफ खैबर पख्तूनख्वा में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति है और दूसरी तरफ पीटीआई के मार्च से बना सियासी तूफान। अब देखना यह है कि सरकार केपी में गवर्नर राज का आखिरी फैसला लेती है या बातचीत का रास्ता चुनती है।