बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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23:34 IST

केरल: 23 साल से कम को शराब पिलाई तो बार-होटलों पर केस, सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति

केरल के उत्पाद शुल्क मंत्री एम. लिजू ने विधानसभा में बताया कि नियम तोड़ने वाले बार और होटलों पर केस दर्ज करने का फैसला उत्पाद शुल्क विभाग ने लिया है।

केरल: 23 साल से कम को शराब पिलाई तो बार-होटलों पर केस, सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

केरल में 23 साल से कम उम्र के युवाओं को शराब पिलाने वाले बार और होटलों की अब खैर नहीं। राज्य सरकार ने ऐसे प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई का एलान किया है और इस बारे में हाल ही में बड़ी घोषणा की गई है।

राज्य के उत्पाद शुल्क मंत्री एम. लिजू ने विधानसभा में बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बार और होटलों पर केस दर्ज करने का फैसला उत्पाद शुल्क विभाग ने लिया है। मंत्री के मुताबिक नियम तोड़कर कम उम्र के बच्चों को शराब पिलाने वाले प्रतिष्ठानों पर मामले दर्ज किए जाएंगे। उत्पाद शुल्क विभाग ऐसे मामलों को गंभीरता से लेगा और नियमों के हिसाब से संबंधित प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करेगा। यह पूरी घोषणा विधानसभा में की गई।

इस काम के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने इसे जीरो टॉलरेंस का मामला घोषित किया है, यानी ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई है।

जीरो टॉलरेंस का मतलब यह है कि नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई करते वक्त किसी को कोई छूट नहीं दी जाएगी। ऐसे मामलों में उत्पाद शुल्क विभाग कानूनी प्रक्रिया चलाएगा। बार और होटलों के लिए यह फैसला अहम है, क्योंकि वहां शराब से जुड़े नियमों का पालन करना जरूरी है। विभाग की इस कार्रवाई से जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।

सरकार का यह फैसला शराब परोसने के नियमों को लागू करने और निगरानी को मजबूत करने की जरूरत की तरफ इशारा करता है। बार और होटल चलाने वालों को यह पक्का करना होगा कि अपने यहां शराब देते समय लागू नियमों का पालन हो रहा है।

केरल सरकार के इस फैसले के बाद यह देखना अहम होगा कि उत्पाद शुल्क विभाग नियम तोड़ने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान कैसे करता है और उन पर क्या कार्रवाई की जाती है। फैसले का मकसद नियमों का पालन पक्का करना और कम उम्र के लोगों को शराब देने की घटनाओं को रोकना है। सरकार ने साफ किया है कि इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। हालांकि इस कार्रवाई से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश और कानूनी प्रावधान अभी तय होना बाकी है।

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