कन्हाळगाव अभयारण्य पर मुनगंटीवार बोले, गांववालों की मर्जी के खिलाफ फैसला नहीं थोपने देंगे
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चंद्रपुर के विधायक और पूर्व वनमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कन्हालगाव अभयारण्य के प्रस्ताव पर गांववालों और सरपंच संगठन का विरोध देखते हुए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
चंद्रपुर: कन्हालगाव अभयारण्य के प्रस्ताव को लेकर 47 गांवों के लोगों में चिंता है। पूर्व वनमंत्री और विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने कहा है कि स्थानीय लोगों की इच्छा के खिलाफ कोई भी फैसला थोपने नहीं देंगे। उनके मुताबिक इस प्रस्ताव से गांववालों के अस्तित्व, आदिवासी भाइयों के जल, जंगल, जमीन के हक और हजारों परिवारों के रोजगार का सवाल खड़ा होगा।
प्रस्ताव को लेकर ग्रामीणों और सरपंच संगठन का विरोध सामने आने पर मुनगंटीवार ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक की और स्थानीय लोगों के सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संवर्धन के नाम पर पीढ़ियों से जंगल से रिश्ता निभाने वाले आदिवासी भाइयों के हक, गांववालों की रोजी-रोटी और उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह मुद्दा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत सरकार के सर्वोच्च स्तर तक ले जाने का इरादा जताया। साथ ही भरोसा दिया कि प्रस्ताव रद्द कराने के लिए वे ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे और हर संभव कोशिश करेंगे।
प्रस्तावित अभयारण्य का क्षेत्र करीब 25138.146 हेक्टेयर है। इसमें गोंडपिपरी तालुका के 39, पोंभुर्णा तालुका के 5 और बल्लारपुर तालुका के 3 गांव, यानी कुल 47 गांव आते हैं। इस इलाके के बड़े वन क्षेत्र का कब्जा फिलहाल वन विकास महामंडल के पास है और महामंडल के जरिए हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है। ग्रामीणों को डर है कि अभयारण्य बनने के बाद कोर और बफर क्षेत्र के गांवों पर कई पाबंदियां आएंगी, जंगल पर आधारित रोजगार घटेगा और पारंपरिक रोजी पर असर पड़ेगा। आदिवासी भाइयों की पारंपरिक जीवनशैली और जंगल से उनके कुदरती रिश्ते पर असर की चिंता भी बैठक में रखी गई।
बैठक में ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के आसपास के पुनर्वासित गांवों का मुद्दा भी उठा। वहां के लोग आज भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों का रुख है कि नए अभयारण्य की वजह से उन्हें फिर से विस्थापन, पाबंदियों और रोजगार के सवालों का सामना न करना पड़े। यह सवाल भी उठाया गया कि चंद्रपुर जिले में ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के जरिए बाघ संरक्षण का बड़ा काम चल ही रहा है, तो एक और अभयारण्य की जरूरत क्या है।
मुनगंटीवार ने इस मामले का एक और गंभीर पहलू बताते हुए जिले में बाघों के हमलों से होने वाली जनहानि का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक वन्यजीव संवर्धन के साथ जंगल के पास रहने वाले लोगों की जान की हिफाजत और सुरक्षा की गारंटी देना भी उतना ही जरूरी है। स्थानीय लोगों को डर है कि अभयारण्य से वन्यजीव और इंसानी बस्तियों के बीच टकराव बढ़ेगा। मुनगंटीवार ने कहा कि संरक्षण की नीति में स्थानीय जनता के हित को केंद्र में रखना जरूरी है।
आगे की कार्रवाई के लिए उन्होंने कुछ अहम सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ 18, 19 या 20 नवंबर को बैठक का समय तय किया जाए और वनमंत्री गणेश नाईक तथा वन विभाग के सचिवों के साथ विस्तार से चर्चा करवाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कन्हालगाव अभयारण्य से जुड़ी सारी प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। नागपुर या चंद्रपुर में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सरपंच संगठन के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों की संयुक्त बैठक करके सभी पक्षों की बात समझी जाए, यह भी उन्होंने साफ किया।
मुनगंटीवार ने कहा कि वनमंत्री रहते हुए उन्होंने कन्हालगाव अभयारण्य का प्रस्ताव रोका था। अब जब ग्रामीणों और सरपंच संगठन का विरोध फिर सामने आया है, तो वे उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उनके मुताबिक अभयारण्य का फैसला सिर्फ प्रशासनिक या संरक्षण के नजरिए से नहीं हो सकता। स्थानीय लोगों के अस्तित्व, रोजगार, सुरक्षा और आदिवासी समाज की भावनाओं को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय में बैठकर गांववालों की दिक्कतों की गंभीरता समझ नहीं आती, इसके लिए गांव जाकर उनसे बात करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिया कि ग्रामीणों को भरोसे में लिए बिना प्रस्ताव आगे न बढ़े, इसके लिए मामला सरकार के सर्वोच्च स्तर तक ले जाकर प्रस्ताव रद्द कराने का पीछा करेंगे।
सरपंच संगठन के अध्यक्ष देविदास सातपुते ने ग्रामीणों की बात रखी। उन्होंने कहा कि सभी सरपंच और गांववाले इस मुद्दे पर एकजुट हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थानीय लोगों के साथ अन्याय न हो और उनके हक सुरक्षित रहें, इसके लिए सुधीर मुनगंटीवार पहल करके सरकार के सामने उनका पक्ष रखेंगे।
बैठक में वन विकास महामंडल के प्रबंध संचालक एम. श्रीनिवास राव, क्षेत्रीय प्रबंधक दिव्याभारती एम., ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना के क्षेत्र संचालक प्रभुनाथ शुक्ला, सरपंच संगठन के अध्यक्ष देविदास सातपुते, अलग-अलग गांवों के सरपंच, नागरिक और वन विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
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