11 करोड़ 28 लाख का किराया बकाया, पुलिस के बंदोबस्त बिल पर महापालिका का इनकार
मीरा-भायंदर महापालिका का कहना है कि पुलिस आयुक्तालय पर किराए की रकम बकाया है, जबकि पुलिस ने बंदोबस्त शुल्क का बिल भेजा है। मामला अब महासभा में है।
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मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय और महापालिका के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर तनातनी शुरू हो गई है। महापालिका का कहना है कि इमारतों, चौकियों और खुली जगहों के किराए के तौर पर आयुक्तालय पर कुल 11 करोड़ 28 लाख 77 हजार रुपये बकाया हैं। दूसरी तरफ पुलिस ने बंदोबस्त शुल्क के नाम पर महापालिका से 5 करोड़ 20 लाख रुपये की मांग की है। महापालिका ने पुलिस का यह दावा सीधे खारिज कर दिया है।
इस विवाद को सुलझाने और बकाया वसूली के लिए महापालिका ने पूरा प्रस्ताव महासभा के सामने रखा है।
पुराना मामला यह है कि मिरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय बनने के बाद शुरुआती दिनों में आयुक्तालय और थानों के पास अपनी अलग जगह नहीं थी। इसलिए मीरा-भायंदर महापालिका ने अपने कब्जे की इमारतें, आरक्षित भूखंड और खुली जगहें पुलिस विभाग को किराए पर दीं। इनमें शांतानगर में श्री पद्मसागर सुरीजी भवन का मुख्य आयुक्तालय, आरक्षण क्रमांक 249 का उपायुक्त कार्यालय, नवघर और काशीगांव पुलिस थाने शामिल थे।
इमारतों का कुल किराया 6 करोड़ 24 लाख रुपये तय हुआ था। इसमें से महापालिका को सिर्फ 3 करोड़ 69 लाख रुपये मिले हैं और 2 करोड़ 55 लाख 36 हजार रुपये अभी बाकी हैं। इसके अलावा मीरा रोड, घोडबंदर और काशीगांव में जब्त की गई गाड़ियां रखने के लिए जो खुली जगहें दी गई थीं, उनका किराया 6 करोड़ 96 हजार रुपये बाकी है। अलग-अलग पुलिस चौकियों का 10 लाख 22 हजार रुपये किराया भी नहीं मिला। आयुक्तालय और उपायुक्त कार्यालय के लिए महापालिका ने जो फर्नीचर खरीदा, उसका 1 करोड़ 82 लाख 22 हजार रुपये भी वसूल नहीं हुआ है। इन सबको जोड़कर महापालिका के प्रस्ताव में 11 करोड़ 28 लाख 77 हजार 389 रुपये का आंकड़ा रखा गया है।
उधर पुलिस ने शहर में अतिक्रमण, फेरीवालों और अवैध निर्माण पर हुई कार्रवाई के साथ चुनावों के वक्त दी गई सुरक्षा के बदले महापालिका को 5 करोड़ 20 लाख 66 हजार रुपये का बिल दिया था। महापालिका ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 483 और हाई कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देकर यह रकम देने से साफ मना कर दिया है। महापालिका का रुख है कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना और महापालिका की आधिकारिक कार्रवाई के दौरान बंदोबस्त देना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है, इसके लिए महापालिका पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जा सकता।
इसी पृष्ठभूमि में बकाया वसूली, घोडबंदर में गाड़ियों के लिए नई जगह देने और आरक्षण क्रमांक 249 के कार्यालय को हमेशा के लिए पुलिस को सौंपने का प्रस्ताव महासभा में रखा गया है। अब सबकी नजर इस पर है कि जनप्रतिनिधि क्या फैसला लेते हैं।