मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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जॉर्जिया से MBBS पर NMC के अलग-अलग जवाब, स्टूडेंट्स उलझन में

जॉर्जिया से MBBS पर NMC के अलग-अलग जवाब, स्टूडेंट्स उलझन में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

जॉर्जिया से MBBS करने वाले स्टूडेंट्स FMGE दे पाएंगे या नहीं, इस सवाल पर नेशनल मेडिकल कमिशन के जवाब अलग-अलग रहे हैं।

विदेश से डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले स्टूडेंट्स के सामने अब बड़ी उलझन खड़ी हो गई है। जॉर्जिया जैसे देश से MBBS की पढ़ाई को लेकर नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के अलग-अलग बयान आए हैं। इसी अस्पष्टता का फायदा उठाकर कथित एजुकेशन कंसल्टेंट और एजेंट स्टूडेंट्स को गलत राह दिखा रहे हैं। इससे हजारों स्टूडेंट्स का करियर और भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

नियम यह है कि भारत के बाहर किसी भी विदेशी मेडिकल संस्थान से MBBS की डिग्री लेने वाले स्टूडेंट्स को भारत में प्रैक्टिस करने के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना जरूरी है। इसी से जुड़े मामले में दो भावी डॉक्टरों ने अलग-अलग समय पर "प्रधानमंत्री ग्रीवेंस पोर्टल" (PM Grievance Portal) पर एक जैसा सवाल पूछा। सवाल था कि जॉर्जिया से 6 साल का MBBS कोर्स पूरा करने वाले स्टूडेंट्स क्या भारत में FMGE देने के पात्र माने जाएंगे। NMC के जवाबों ने मामले को और पेचीदा कर दिया।

NMC ने 24 सितंबर को अपने 2021 के नियमों का हवाला देते हुए साफ किया कि विदेशी डिग्री तभी वैध मानी जाएगी, जब संबंधित देश (जैसे जॉर्जिया) कोर्स पूरा होने के फौरन बाद स्टूडेंट्स को स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करने का लाइसेंस दे।

लेकिन 13 अक्टूबर को दूसरे उम्मीदवार ने यही सवाल पूछा तो कमिशन का रुख बदला हुआ दिखा। इस बार कहा गया कि स्वतंत्र लाइसेंसिंग सिस्टम से जुड़े इन प्रावधानों की जांच एक सक्षम अधिकारी और विशेषज्ञ समिति कर रही है।

इसके बाद तीसरे स्टूडेंट ने पूछा कि दोनों में से कौन सा जवाब सही है। इस पर NMC ने सिर्फ पुराने 2021 के नियम दोहरा दिए। PTI ने NMC के सचिव राघव लँगर से स्पष्टीकरण मांगा, तो उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

दिल्ली हाई कोर्ट में मेडिकल मामलों के कानूनी जानकार एडवोकेट सचिन जैन का कहना है कि इसी अस्पष्टता का फायदा भारी कमीशन लेने वाले एजुकेशन कंसल्टेंट उठा रहे हैं। वे स्टूडेंट्स को NMC का दूसरा जवाब दिखाकर झूठा भरोसा देते हैं कि "इंडिपेंडेंट लाइसेंस की शर्त जल्द हटा दी जाएगी या कोई और रास्ता निकल आएगा।" कानूनी जानकारों के मुताबिक ऐसे झूठे वादों से स्टूडेंट्स का भविष्य बर्बाद हो सकता है, क्योंकि NMC खुद कानून नहीं बदल सकता। कानून संसद में बनते हैं और NMC सिर्फ सरकार को बदलाव की सिफारिश कर सकता है।

जॉर्जिया के नेशनल सेंटर फॉर एजुकेशन क्वालिटी एन्हांसमेंट (NCEQE) के जवाबों से भी गड़बड़ बढ़ी है। NCEQE का दावा है कि जॉर्जिया विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए NMC की सभी जरूरतें पूरी करता है। दूसरी तरफ उसके नियम कहते हैं कि MD प्रोग्राम के ग्रेजुएट बिना किसी अतिरिक्त परीक्षा के "जूनियर डॉक्टर" के तौर पर काम कर सकते हैं, लेकिन स्वतंत्र प्रैक्टिस नहीं कर सकते। उन्हें किसी अधिकृत डॉक्टर की देखरेख में ही काम करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने कहा कि NMC के नियम बिल्कुल साफ हैं। स्टूडेंट्स ने जिस देश से पढ़ाई की है, वहां उन्हें स्वतंत्र प्रैक्टिस का लाइसेंस मिलना जरूरी है। ऐसे में NCEQE के दावे भारतीय स्टूडेंट्स को भ्रमित करने वाले हैं और जॉर्जिया के मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाने वाले हैं।

हालात को देखते हुए कानूनी जानकारों और वकीलों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और NMC से मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द दोनों आदेशों के साथ विदेशी यूनिवर्सिटियों की एक आधिकारिक और साफ सूची जारी करे, जो FMG की सभी पात्रता शर्तों पर पूरी तरह खरी उतरती हो।

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