वाई के महागणपती घाट पर प्राइवेट पार्किंग से जाम, लोगों ने नगरपालिका से मांगी अधिकृत पार्किंग
वाई के महागणपती मंदिर के सामने प्राइवेट पार्किंग की वजह से रोज जाम लग रहा है और स्थानीय लोग नगरपालिका से जांच और अधिकृत पार्किंग की मांग कर रहे हैं।
वाई शहर के महागणपती मंदिर परिसर में गणपती घाट पर ट्रैफिक जाम की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। मंदिर के सामने की जगह में चल रही प्राइवेट पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें हैं कि उन्हें बेवजह परेशानी झेलनी पड़ रही है। गाड़ी पार्किंग में ले जाते वक्त जब तक पावती की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक गाड़ियां सड़क पर ही कतार में खड़ी रहती हैं। इससे इस इलाके में ट्रैफिक का बुरा हाल बार-बार देखने को मिल रहा है।
महागणपती मंदिर के सामने का यह इलाका वाई शहर के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले हिस्सों में से एक है। इसलिए सड़क के किनारे गाड़ियों की भीड़ बढ़ते ही थोड़ी देर में जाम गंभीर रूप ले लेता है। लोगों की मांग है कि अगर प्राइवेट पार्किंग की वजह से सार्वजनिक सड़क पर ट्रैफिक रुक रहा है, तो नगरपालिका इस व्यवस्था की फौरन जांच करे और नियमों के खिलाफ कुछ पाया जाए तो कानूनी कार्रवाई करे।
इस इलाके में ट्रैफिक संभालने के लिए होमगार्ड तैनात हैं। फिर भी शिकायतें हैं कि वाहन चालक उनकी बात पर ध्यान नहीं देते। नतीजा यह होता है कि गाड़ियां बेतरतीब खड़ी हो जाती हैं और कुछ ही देर में सड़क पर जाम लग जाता है। इसलिए सिर्फ होमगार्ड लगा देने से मसला हल नहीं होगा। ट्रैफिक का नियोजन, पार्किंग में अनुशासन और नियमों पर असरदार अमल जरूरी है।
अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि जाम का पक्का हल निकालने के लिए नगरपालिका नदीक्षेत्र में उपलब्ध जगह का सोच-समझकर इस्तेमाल करे और वहां अधिकृत पार्किंग बनाए। ऐसा हुआ तो मुख्य सड़क पर गाड़ियों का बोझ घटेगा, मंदिर परिसर का ट्रैफिक सुचारु होगा और अधिकृत पार्किंग शुल्क से नगरपालिका को आमदनी का जरिया भी मिल सकता है।
वाई के पर्यटन और धार्मिक वैभव का केंद्र महागणपती परिसर ही है। जब वहीं लोगों को पार्किंग और जाम से जूझना पड़े, तो प्रशासन के लिए इसे गंभीरता से लेने का वक्त आ गया है। अगर प्राइवेट पार्किंग से सार्वजनिक ट्रैफिक बिगड़ रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि नगरपालिका, पुलिस प्रशासन और संबंधित विभाग मिलकर इस इलाके का मुआयना करें और पार्किंग के नियमन, ट्रैफिक कंट्रोल और वैकल्पिक पार्किंग पर ठोस फैसला लें।
स्थानीय नागरिकों की भावना है कि ऐसा न हुआ तो महागणपती घाट पर जाम का फंदा दिन-ब-दिन और कसता जाएगा।