इटली में महंगाई और शिक्षा पर बजट कटौती के खिलाफ सड़कों पर लोग, मेलोनी ने हिंसा की निंदा की
रोम, मिलान, तोरिनो और बोलोन्या में हजारों लोग उतरे सड़क पर, पुलिस से झड़पें; प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी बोलीं, शांतिपूर्ण प्रदर्शन हक है, हिंसा नहीं चलेगी।
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इटली में इन दिनों माहौल काफी गरम है। बढ़ती महंगाई, पढ़ाई के लिए कम पड़ता फंड और बिगड़ी हुई सेहत व्यवस्था के खिलाफ हजारों लोग, स्टूडेंट्स और मजदूर संगठन सड़क पर उतर आए हैं। राजधानी रोम के साथ मिलान, तोरिनो और बोलोन्या जैसे बड़े शहरों में भी प्रदर्शन हो रहे हैं।
कई जगह प्रदर्शनकारियों ने स्कूल और यूनिवर्सिटी की इमारतों पर कब्जा करने की कोशिश की। इसके बाद आंदोलन करने वालों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
आंदोलन की शुरुआत मुख्य रूप से पढ़ाई-लिखाई की दिक्कतों से हुई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़कर सामाजिक और राजनीतिक हो गया है। फ्रांस और स्पेन में हाल ही में मजदूरों और स्टूडेंट्स के जो आंदोलन हुए, उनसे प्रेरणा लेकर इटली के वामपंथी संगठन और लेबर यूनियनें एक साथ आ गई हैं और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन करने वालों का आरोप है कि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की अगुवाई वाली दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार की नीतियां आम लोगों के हित में नहीं हैं और उनसे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी है।
सरकारी शिक्षा की बदहाली इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। स्टूडेंट्स ने "नो मेलोनी डे" (No Meloni Day) और "नो बजट कट" जैसे नारे लगाते हुए देश भर में बड़े मार्च निकाले। स्टूडेंट संगठनों का गंभीर आरोप है कि सरकारी स्कूल और कॉलेजों का बजट घटाकर पैसा सैन्य खर्च की तरफ मोड़ा जा रहा है।
स्कूलों की इमारतों की खस्ता हालत, टीचरों की कमी और बढ़ती फीस की वजह से मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के नौजवानों की पढ़ाई खतरे में है। ऊपर से महंगाई और अनाज के आसमान छूते दामों ने आम इटालियन की कमर तोड़ दी है। देश की सबसे बड़ी मजदूर संगठन सीजीआयएल (CGIL) ने आंदोलन को सीधा समर्थन दिया है और वेतन बढ़ाने तथा सुरक्षित रोजगार की मांग जोर से उठाई है।
सोशल मीडिया पर सिद्धांत मिश्रा (@siddhantvm) ने 17 अक्टूबर 2026 को एक पोस्ट में लिखा कि यूरोप की सड़कें जल रही हैं। उनके मुताबिक फ्रांस में करीब 7,000 लोग हिरासत में लिए गए, जिनमें 86 फीसदी नाबालिग हैं, और एक किशोर ने स्टन ग्रेनेड से अपना हाथ खो दिया। इटली के बारे में उन्होंने लिखा कि मिलान के ड्यूओमो पर झड़पें हुईं और तोरिनो में पत्थर और वाटर कैनन चले। बेल्जियम, ग्रीस और स्पेन में भी स्टूडेंट्स सड़कों पर हैं। पोस्ट में गुस्से की वजह जर्जर स्कूल, टीचरों की कमी और रहन-सहन की बढ़ती लागत बताई गई।
इटली के इस बढ़ते असंतोष पर प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी मांगों और विचारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का पूरा हक है। सीजीआयएल की रैली में शामिल हुए हजारों लोगों के शांतिपूर्ण आंदोलन का वे पूरा सम्मान करती हैं, यह भी उन्होंने कहा।
साथ ही मेलोनी ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और सरकारी संपत्ति की तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "शांतिपूर्ण आंदोलन करना हक है, लेकिन शहरों में आगजनी करना या पुलिस पर हमले करना लोकतंत्र नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि हिंसा करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां और वामपंथी नेता हिंसा की साफ निंदा करने में नाकाम रहे हैं।
यह सवाल अब सिर्फ इटली तक सीमित नहीं दिख रहा। पूरे यूरोप में महंगाई और रहन-सहन के बढ़ते खर्च के खिलाफ गुस्सा फैलता नजर आ रहा है। फ्रांस, स्पेन और इटली में नौजवान सरकारी नीतियों के खिलाफ बड़ी तादाद में आक्रामक हो रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों में तनाव और पुलिस से झड़पों के कारण मेलोनी सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। आंदोलन करने वाले संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर आने वाले दिनों में सरकार ने महंगाई काबू करने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन पूरे देश में और तेज हो जाएगा।