इजराइल में किसी को बहुमत नहीं, राष्ट्रपति हर्जोग ने शुरू की पार्टियों से बात, नेतन्याहू और आइज़नकोट आमने-सामने
इजराइल के आम चुनाव में किसी को साफ बहुमत नहीं मिला। राष्ट्रपति हर्जोग सभी पार्टियों से मिल रहे हैं और नेतन्याहू और आइज़नकोट के बीच मुकाबला कड़ा है।
इजराइल के आम चुनाव के नतीजे आ चुके हैं और उसके बाद वहां की सियासत तेज़ी से करवट ले रही है। किसी भी एक पार्टी या गठबंधन को साफ बहुमत नहीं मिला, इसलिए देश में एक बार फिर त्रिशंकु हालात बन गए हैं।
ऐसे में स्थिर और मज़बूत सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति आइज़ैक हर्जोग ने नई चुनी गई क्नेसेट, यानी वहां की संसद, की छोटी-बड़ी सभी पार्टियों के नुमाइंदों से मशविरा शुरू कर दिया है। बातचीत जेरुसलम में राष्ट्रपति भवन में हो रही है और उसका सीधा प्रसारण किया जा रहा है। पूरी दुनिया की नज़र इन बैठकों पर है। सवाल यही है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या गडी आइज़नकोट नए प्रधानमंत्री बनते हैं।
इजराइल के सियासी और संवैधानिक नियमों में, जब चुनाव में किसी को साफ बहुमत न मिले, तो राष्ट्रपति की भूमिका बहुत अहम हो जाती है। राष्ट्रपति हर्जोग ने क्नेसेट के सभी संसदीय गुटों के साथ बैठकों का दूसरा दौर शुरू किया है। इसका मकसद यह तय करना है कि देश की अगली अगुवाई के लिए कौन सा नेता सबसे ठीक रहेगा और बहुमत का आंकड़ा छूने की ताकत किसके पास है।
इन बैठकों में हर पार्टी से कहा जा रहा है कि वह अपनी पसंद के प्रधानमंत्री उम्मीदवार को समर्थन दे। कानूनी प्रावधान के मुताबिक राष्ट्रपति गठबंधन सरकार बनाने का पहला मौका सिर्फ सबसे बड़ी पार्टी के नेता को नहीं देते। यह मौका उस सांसद को मिलता है, जिसके पास दूसरी पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने की सबसे ज़्यादा गुंजाइश हो। राष्ट्रपति के दफ्तर ने 5 नवंबर 2026 को बताया था कि हर्जोग जेरुसलम के राष्ट्रपति आवास में क्नेसेट के गुटों से मशविरा जारी रखे हुए हैं।
फिलहाल संसद में दो बड़े खेमे आमने-सामने हैं। एक तरफ लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी की ताकत है। दूसरी तरफ विपक्ष की अगुवाई कर रहे गडी आइज़नकोट और उनकी याशर पार्टी है।
समर्थन की तस्वीर भी धीरे-धीरे साफ हो रही है। रिलीजियस ज़ायोनिस्ट पार्टी, शास और ज़ेहुत जैसी धार्मिक और दक्षिणपंथी पार्टियों ने नेतन्याहू को ही फिर से प्रधानमंत्री बनाने के लिए खुलकर समर्थन जताया है। वहीं याशर पार्टी के प्रमुख गडी आइज़नकोट की अगुवाई को द डेमोक्रेट्स, बेयाशाद, रा'आम और अविग्डोर लिबरमन की अगुवाई वाली 'यिस्राएल बेतेनू' पार्टी ने पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है।
दो गुट अभी किसी तरफ नहीं गए हैं। 'यूनाइटेड तोराह जूडाइज़्म' के देगेल हातोराह गुट के चार प्रतिनिधियों ने कहा है कि वे फिलहाल किसी भी उम्मीदवार को समर्थन नहीं देंगे। अगुदात इजराइल के सदस्यों ने अपना रुख अब तक छुपाकर रखा है। इसी वजह से सत्ता की यह दौड़ बेहद कांटे की हो गई है।
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