बुधवार, 4 नवंबर 2026

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मिडटर्म नतीजों के बाद ट्रंप का रुख बदला, इजराइल की 4 अरब डॉलर की मदद रोकी, ईरान पर भी नरमी

मिडटर्म नतीजों के बाद ट्रंप का रुख बदला, इजराइल की 4 अरब डॉलर की मदद रोकी, ईरान पर भी नरमी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव के नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति में अचानक बड़ा यू-टर्न लिया है। चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, और उसके बाद ट्रंप ने साफ संकेत दिए कि वे ईरान पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे। साथ ही उन्होंने अमेरिका के बेहद करीबी दोस्त इजराइल को हर साल दी जाने वाली 4 अरब डॉलर की आर्थिक मदद रोकने का ऐलान भी कर दिया।

वोटिंग से पहले अमेरिकी प्रशासन का रवैया ईरान के खिलाफ काफी आक्रामक था। मतदान से कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी फौज ने ईरान के केशम (Qeshm) द्वीप पर मिसाइलें दागी थीं, जिससे सैन्य तनाव बढ़ गया था। लेकिन नतीजे हाथ में आते ही ट्रंप के रुख में बड़ा बदलाव दिखा।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की फिलहाल ईरान पर नया सैन्य हमला करने की कोई योजना नहीं है। उन्हें भरोसा है कि दोनों देश बातचीत की टेबल पर शांति का रास्ता निकाल लेंगे। ट्रंप के शब्दों में, "हम दोनों देश जल्दी ही एक बैठक की तारीख तय करेंगे और बातचीत से मसला सुलझाएंगे।"

ट्रंप का अंदाजा था कि चुनाव के ऐन पहले केशम द्वीप पर की गई सैन्य कार्रवाई से रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक फायदा मिलेगा। मगर अमेरिकी वोटरों ने युद्ध की इस सियासत को साफ नकार दिया। वोटरों की बढ़ती नाराजगी और युद्ध के डर के चलते रिपब्लिकन पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी, और इसी वजह से प्रशासन को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचना पड़ रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा फैसला इजराइल की मदद पर रोक का है। ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिका इजराइल को हर साल दी जाने वाली 4 अरब डॉलर की सीधी आर्थिक मदद साल के अंत से बंद कर देगा। रुपयों में यह रकम अंदाजन 33 हजार करोड़ से ज्यादा बैठती है। ट्रंप ने बताया कि इस फैसले को लेकर वे इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से पहले ही बात कर चुके हैं।

ट्रंप के मुताबिक, "इजराइल अब एक बेहद मजबूत अर्थव्यवस्था है और उसे इस सीधी मदद की जरूरत नहीं रही।" उन्होंने यह भी साफ किया कि सीधी आर्थिक मदद रोके जाने के बावजूद इजराइल अमेरिका से हथियार खरीदना जारी रख सकेगा।

नतीजे ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका साबित हुए हैं। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में साफ बहुमत हासिल कर लिया है, और सीनेट में भी रिपब्लिकन पार्टी की पकड़ ढीली पड़ी है। बताया गया है कि अमेरिका के पिछले 50 साल के इतिहास में यह पहली बार है कि एक ही मध्यावधि चुनाव में संसद के दोनों सदनों में ताकत का संतुलन पूरी तरह बदल गया।

मंगलवार रात पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने पार्टी की हार का ठीकरा सीधे ईरान युद्ध के मुद्दे पर फोड़ा। उन्होंने खुले तौर पर माना, "हमारी पार्टी की हार के लिए ईरान युद्ध का विवाद बड़े पैमाने पर जिम्मेदार था।" विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध से अमेरिकी जनता में पैदा हुए डर और महंगाई की मार के कारण वोटरों ने डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में फैसला दिया।

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