हर हादसे में नहीं खुलता एयरबैग, टक्कर की रफ्तार और तीव्रता तय करती है
कार में एयरबैग को सबसे अहम सेफ्टी फीचर माना जाता है, लेकिन हर एक्सीडेंट में वह खुलेगा ही, यह जरूरी नहीं।
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कार में सफर करते वक्त सुरक्षा के लिहाज से एयरबैग को सबसे अहम फीचर्स में गिना जाता है। बहुत से लोग मानकर चलते हैं कि हादसा होते ही एयरबैग अपने आप खुल जाएगा और सवारियों को बचा लेगा। लेकिन हकीकत में हर एक्सीडेंट में एयरबैग खुलता ही हो, ऐसा नहीं है।
एयरबैग खुलेगा या नहीं, यह कई बातों पर टिका होता है। गाड़ी की रफ्तार, टक्कर की तीव्रता, टक्कर किस दिशा से हुई और कार के सेंसर ने क्या जानकारी दर्ज की, इन सबसे यह तय होता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि एयरबैग असल में कब और कैसे काम करता है।
सबसे पहले सवाल यह आता है कि कितनी रफ्तार की टक्कर पर एयरबैग खुलता है। हर कार के लिए कोई एक तय रफ्तार नहीं होती। आम तौर पर सामने से हुई गंभीर टक्कर में एयरबैग के एक्टिव होने की गुंजाइश ज्यादा रहती है। फिर भी सिर्फ इसलिए कि गाड़ी 30, 40 या 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही थी, एयरबैग खुल ही जाएगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता।
मिसाल के तौर पर, कम रफ्तार में भी अगर गाड़ी किसी सख्त चीज से जोर से टकरा जाए, तो एयरबैग खुल सकता है। उलटे, ज्यादा रफ्तार में हुई कुछ मामूली टक्करों में एयरबैग नहीं भी खुलेगा। वजह यह है कि कार के सेंसर टक्कर से रफ्तार में आए अचानक बदलाव और उसकी तीव्रता को परखते हैं।
अब देखिए कि चंद मिलीसेकंड में एयरबैग कैसे खुलता है। कार में एयरबैग कंट्रोल यूनिट और खास क्रैश सेंसर लगे होते हैं। हादसे के वक्त ये सेंसर टक्कर की तीव्रता भांपकर कंट्रोल यूनिट को जानकारी भेजते हैं। जैसे ही टक्कर गंभीर लगती है, कंट्रोल यूनिट एयरबैग खोलने का आदेश दे देती है।
इसके बाद एयरबैग का इन्फ्लेटर चालू होता है और खास गैस की मदद से एयरबैग तेजी से फूल जाता है। यह पूरी प्रक्रिया करीब 20 से 50 मिलीसेकंड के आसपास पूरी हो सकती है। इससे ड्राइवर या सवारियों का सिर और छाती सीधे कार के सख्त हिस्सों से टकराने का खतरा घट जाता है।
तो फिर हर हादसे में एयरबैग क्यों नहीं खुलता? वह हर टक्कर के लिए एक्टिव होगा ही, ऐसा नहीं है। पीछे से लगी टक्कर, मामूली टक्कर, कुछ खास साइड की टक्करें या गाड़ी के निचले हिस्से पर लगे झटके में संबंधित एयरबैग खुले, यह जरूरी नहीं। यह कार के डिजाइन और एयरबैग के प्रकार पर निर्भर करता है।
खास बात यह है कि सीटबेल्ट और एयरबैग, दोनों सेफ्टी सिस्टम एक साथ मिलकर काम करने के लिए बनाए गए हैं। एयरबैग होने के बावजूद सीटबेल्ट लगाना बेहद जरूरी है। सीटबेल्ट न लगा हो तो एयरबैग खुलते वक्त ही सवारियों को गंभीर चोट लगने की आशंका रहती है।
इसलिए कार खरीदते समय सिर्फ एयरबैग की गिनती देखने के बजाय उसकी सेफ्टी टेस्ट, एयरबैग के प्रकार, सीटबेल्ट और बाकी सेफ्टी फीचर्स की जांच करना भी उतना ही अहम है।