बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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19:12 IST

वर्धा में सोयाबीन को हमीभाव से ज्यादा दाम, फिर भी घटे उत्पादन से किसान की लागत निकलना मुश्किल

वर्धा जिले में बारिश के अंतराल से सोयाबीन का उत्पादन घटा है। खुले बाजार में समर्थन मूल्य से करीब एक हजार रुपये ज्यादा भाव मिल रहा है, लेकिन किसानों का कहना है कि लागत निकलना कठिन है।

वर्धा जिले में इस साल बारिश ने गच्चा दे दिया, जिसकी वजह से सोयाबीन का उत्पादन कम हुआ है। सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5,707 रुपये घोषित किया गया है, मगर खुले बाजार में इससे एक हजार रुपये ज्यादा भाव दिया जा रहा है। हर साल किसानों को सोयाबीन के बाजारभाव की चिंता रहती थी, इस बार वह चिंता नहीं है। लेकिन उत्पादन घटने से किसानों को इसका उतना फायदा नहीं मिलने वाला, जितना मिलना चाहिए।

कृषि विभाग ने इस साल जिले में 1 लाख 25 हजार 654.94 हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई का लक्ष्य तय किया था। पर बारिश के मौसम की शुरुआत में कम पानी गिरा, इसलिए बुवाई में देर हो गई। नतीजा यह कि 1 लाख 19 हजार 740.70 हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई। हर साल तय क्षेत्र से ज्यादा रकबे में सोयाबीन बोया जाता है। इस बार अगस्त महीने से बारिश गायब रही और उत्पादन में बड़ी गिरावट आई।

नया सोयाबीन बाजार में आने से पहले कुछ मात्रा में बचा हुआ सोयाबीन आ रहा था। उसे करीब 7 हजार रुपये का भाव दिया जा रहा था। अब दशहरा और दिवाली भी पास आ रही है। इसलिए किसान खेत में बचे सोयाबीन की कटाई करके उसे बेचने के लिए बाजार ला रहे हैं। इससे भाव कुछ नीचे आए हैं। अभी सोयाबीन को 5,900 से 6 हजार 700 रुपये तक का भाव मिल रहा है। किसानों का कहना है कि उत्पादन में भारी गिरावट के कारण समर्थन मूल्य से एक हजार रुपये ज्यादा भाव मिलने पर भी उनकी उत्पादन लागत निकलना मुश्किल होगा।

हर साल सोयाबीन बाजार में आने पर दाने में आर्द्रता यानी नमी होने की वजह से भाव कम दिया जाता था। नाफेड की तरफ से भी समर्थन मूल्य से कम भाव दिया जाता था। इस साल डेढ़ महीने से बारिश नहीं हुई है। कड़ी धूप में भरी हुई फलियां फूट गई हैं और दाने सख्त सूख गए हैं। इसलिए भी बाजार में अच्छा भाव मिल रहा है।

नया सोयाबीन आते ही भाव नीचे गिर जाते हैं, इसलिए समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए नाफेड की खरीद शुरू करने की मांग की जाती है। इस साल हालत उलटी है। खुले बाजार में समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव मिल रहा है, इसलिए कहा जा रहा है कि नाफेड की खरीद बंद रहेगी।

वर्धा कृषि उपज मंडी समिति के सभापति अमित गावंडे ने कहा, "सोयाबीन का उत्पादन कम हुआ है। भारी सूखे वाले मराठवाड़ा के जिलों में सोयाबीन का उत्पादन ही नहीं हुआ। इससे सोयाबीन की शॉर्टेज बढ़ी है। इसलिए खुले बाजार में भाव ज्यादा मिल रहा है। कुछ महीनों से बारिश के गायब रहने से कपास सूखने लगेगा। रबी की फसल लेना कई किसानों के लिए संभव नहीं है, इसलिए किसान की पूरी उम्मीद सोयाबीन की फसल पर ही टिकी है।"

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