बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:32 IST

गोंदिया जिले में 3,302 इलेक्ट्रिक वाहन दर्ज, ई-दोपहिया सबसे ज्यादा

पेट्रोल के बढ़ते दाम से लोग ई-वाहनों की तरफ मुड़ रहे हैं, पर ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग स्टेशन की कमी बड़ी दिक्कत है।

गोंदिया जिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। उपप्रादेशिक परिवहन विभाग के पास इस वक्त जिले में 3 हजार 302 इलेक्ट्रिक वाहन दर्ज हैं। इनमें ई-दोपहिया, चारपहिया, यात्री रिक्शा और माल ढुलाई के वाहन शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या ई-दोपहिया वाहनों की है।

प्रदूषण पर रोक लगाने और पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरी तरफ पेट्रोल के बढ़ते दाम की वजह से आम लोगों का झुकाव भी ई-वाहनों की तरफ बढ़ा है। दोपहिया गाड़ियों की कीमतें और पेट्रोल की महंगाई, दोनों मिलकर आम आदमी के लिए वाहन का खर्च उठाना मुश्किल बना रही हैं। इसलिए ई-वाहनों का चलन धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है।

गोंदिया जिले में भी पिछले कुछ महीनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ी है। ई-दोपहिया के साथ ई-चारपहिया और ई-रिक्शा भी सड़कों पर चलते दिख रहे हैं। उपप्रादेशिक परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2 हजार 18 ई-दोपहिया और 410 तीनपहिया इलेक्ट्रिक वाहन दर्ज हैं। इन वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल से ईंधन पर निर्भरता घटाने और प्रदूषण को काबू में रखने में मदद मिलती है।

पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 100 रुपये से ऊपर होने से यात्री रिक्शा चालकों को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। सवारी ढोने से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन में ही चला जाता है। इसलिए कई चालक ई-रिक्शा को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। एक बार चार्ज करने पर कुछ इलेक्ट्रिक वाहन 80 किलोमीटर तक चल सकते हैं, लेकिन यह दूरी वाहन की क्षमता और कंपनी के हिसाब से बदलती है।

लोगों का कहना है कि बाजार में नए इलेक्ट्रिक वाहन आने के बाद उन्हें खरीदने का रुझान बढ़ा था। आंकड़ों से लगता है कि अभी यह रुझान कुछ हद तक कम हुआ है। फिर भी हर साल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में इजाफा हो रहा है।

ई-वाहन बढ़ रहे हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन की उपलब्धता बड़ा सवाल बनी हुई है। खासकर ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा न होने से वाहन चलाने वालों को घर की बिजली पर ही निर्भर रहना पड़ता है। चार्जिंग स्टेशन खड़ा करने के लिए जरूरी बिजली कनेक्शन, पर्याप्त बिजली क्षमता और बुनियादी ढांचा होना अहम है।

इस बीच रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजार के इलाके में इलेक्ट्रिक वाहनों की आवाजाही बढ़ रही है। लेकिन कुछ वाहनों में क्षमता से ज्यादा सवारी बैठाई जा रही हैं और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो रहा है, जो चिंता की बात है। इसलिए ई-वाहनों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार, सुरक्षित आवाजाही और नियमों पर सख्ती से अमल की जरूरत जताई जा रही है।

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