पेट्रोल बाइक टैक्सी फिलहाल चलेंगी, इलेक्ट्रिक होने के लिए कंपनियों को नौ महीने की मोहलत
राज्य सरकार ने ऐप आधारित कंपनियों को पूरा बेड़ा 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक करने के लिए कुल नौ महीने दिए हैं। इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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राज्य सरकार ने ऐप के जरिए सवारी ढोने वाली कंपनियों को बड़ी राहत दी है। पेट्रोल से चलने वाली बाइक टैक्सी को फिलहाल के लिए अधिकृत कर दिया गया है। कंपनियों को अपना पूरा बेड़ा 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक करने के लिए कुल नौ महीने की खास मोहलत मंजूर हुई है। इस मोहलत के दौरान कंपनियों पर कोई जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
यह मोहलत महाराष्ट्र बाइक टैक्सी नियम 2025 के तहत अस्थायी लाइसेंस लेने वाली कंपनियों के लिए है और दो चरणों में मिलेगी। पहला चरण छह महीने का होगा और दूसरा तीन महीने का। इन दोनों चरणों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंजूरी दी है। परिवहन विभाग ने इसका आदेश राज्य के परिवहन आयुक्त को भेज दिया है।
इससे पहले कंपनियों ने ई-बाइक की सीमाओं और चार्जिंग की कमजोर सुविधाओं का हवाला देकर परिवहन विभाग से और वक्त मांगा था। विभाग ने इस पर प्रस्ताव तैयार किया और आखिरी मंजूरी के लिए उसे मुख्यमंत्री के पास भेजा था। अब उसी पर फैसला हो गया है।
फिलहाल ओला, उबर और रैपिडो जैसी बड़ी ऐप आधारित कंपनियों समेत कुल आठ निजी और सहकारी कंपनियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन दिया है। मिले हुए सभी आवेदनों और कागजात की जांच चल रही है। यह कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुंबई महानगर प्रदेश परिवहन प्राधिकरण (एमएमआरटीए) की बैठक में इन कंपनियों के आखिरी लाइसेंस पर आधिकारिक फैसला लिया जाएगा।
इस फैसले से अभी पेट्रोल पर चल रहे हजारों बाइक टैक्सी चालकों को बड़ी राहत मिली है। साथ ही आने वाले वक्त में सार्वजनिक परिवहन के पूरी तरह इलेक्ट्रिक होने का रास्ता भी साफ हुआ है।
चालकों और कंपनियों की मांग क्या थी, यह भी देखना जरूरी है। सितंबर महीने में महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री, राज्य के परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को चिट्ठी लिखी थी। उसमें पूरा बेड़ा इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लाने के लिए कम से कम डेढ़ साल का वक्त मांगा गया था।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गावडे ने साफ कहा था कि इस काम में लगे ज्यादातर राइडर मध्यम या उच्च मध्यम वर्ग के परिवारों से आते हैं। अचानक महंगी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदना उनके लिए आर्थिक तौर पर बहुत मुश्किल है। उन्होंने राज्य में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की अपेक्षाकृत कम उम्र जैसी दिक्कतों की तरफ भी ध्यान दिलाया था।
दूसरी तरफ aggregators कंपनियों ने महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति का हवाला देते हुए 2030 तक की मोहलत मांगी थी। इन सभी मांगों के बाद राज्य सरकार ने नौ महीने का वक्त दिया है।