मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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गोकुल अध्यक्ष चुनाव के बीच रिटर्निंग अफसर मोसमी बर्डे-चौगुले का प्रमोशन पर तबादला

गोकुल अध्यक्ष चुनाव के बीच रिटर्निंग अफसर मोसमी बर्डे-चौगुले का प्रमोशन पर तबादला तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

गोकुल दूध संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव अटका है और मामला कोर्ट में है। इसी बीच चुनाव निर्णय अधिकारी मोसमी बर्डे-चौगुले को प्रमोशन देकर छत्रपति संभाजीनगर भेजा गया है।

कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ, यानी गोकुल दूध संघ, के अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार ने चुनाव निर्णय अधिकारी और उपजिलाधिकारी मोसमी बर्डे-चौगुले को प्रमोशन देकर उनका तबादला कर दिया है। संघ के हाल के चुनाव में पहले ही कई अनपेक्षित मोड़ आ चुके हैं। कांग्रेस नेता सतेज पाटील की चाल से मंत्री हसन मुश्रीफ के पैनल को करारी हार मिली थी, और उसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ है।

राज्य सरकार ने मोसमी चौगुले को अस्थायी तौर पर अपर जिलाधिकारी (ग्रुप-ए) के पद पर नियुक्त किया है। उन्हें छत्रपति संभाजीनगर के विभागीय आयुक्त कार्यालय में सहआयुक्त (पुनर्वास) बनाकर भेजा गया है। सामान्य प्रशासन विभाग के स्थापना बोर्ड की सिफारिश पर इसका सरकारी आदेश 31 अक्टूबर को जारी हुआ।

बताया जा रहा है कि मोसमी चौगुले चुनाव की अधिसूचित पोस्ट पर काम कर रही हैं, इसलिए वे नए पद का चार्ज फौरन नहीं ले सकेंगी। केंद्रीय चुनाव आयोग की विशेष सघन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें कोल्हापुर के अपने मौजूदा पद पर ही काम करना होगा। महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी जब इस प्रक्रिया के पूरे होने का आधिकारिक ऐलान करेंगे, उसके बाद ही वे छत्रपति संभाजीनगर में जॉइन कर पाएंगी। अध्यक्ष पद का चुनाव जब अहम मोड़ पर है, तब आए इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सहकारी क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई है।

अध्यक्ष चुनाव को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। संघ के चुनाव नतीजों में राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी गठबंधन ने 13 सीटें जीतीं, जबकि महायुति को 12 सीटें मिलीं। अध्यक्ष चुनने के लिए बुलाई गई बैठक में जरूरी 14 संचालकों का कोरम पूरा नहीं हुआ, इसलिए चुनाव हो नहीं सका।

इसके बाद समविचारी गठबंधन के 13 संचालकों ने मुंबई हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में याचिका दायर की। गठबंधन का दावा है कि अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 संचालकों की मौजूदगी जरूरी नहीं है। सुनवाई के बाद हुई पहली बैठक में भी महायुति के 12 संचालक हाजिर नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने इन 12 संचालकों को नोटिस जारी किया है। याचिका में राज्य सरकार के साथ इन संचालकों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।

कोल्हापुर सर्किट बेंच की सुनवाई के बाद महायुति ने अपना रुख साफ किया। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर और चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा है कि वे अध्यक्ष चुनाव की अगली बैठक में हाजिर रहेंगे। एक तरफ कोर्ट में लड़ाई चल रही है और दूसरी तरफ चुनाव निर्णय अधिकारी का तबादला हुआ है। अब सहकारी क्षेत्र की नजर इस पर है कि अध्यक्ष का चुनाव आखिर कब होगा और आगे की प्रक्रिया में क्या मोड़ आएगा।

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