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गावरवाडी में पानी का भारी संकट, महिलाओं ने ग्राम पंचायत दफ्तर पर निकाला हंडा मोर्चा

आंबेगाव तालुका के गावरवाडी में पीने के पानी की किल्लत के खिलाफ 30 से 40 महिलाओं ने ग्राम पंचायत दफ्तर पर हंडा मोर्चा निकाला।

गावरवाडी में पानी का भारी संकट, महिलाओं ने ग्राम पंचायत दफ्तर पर निकाला हंडा मोर्चा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आंबेगाव तालुका की काळेवाडी-दरेकरवाडी ग्रामपंचायत समूह के गावरवाडी गांव में इन दिनों पीने के पानी की बहुत भयंकर किल्लत हो गई है। एक हंडा पानी के लिए यहां की महिलाओं को तेज धूप में खेतों और जंगल-झाड़ियों में भटकना पड़ रहा है। प्रशासन के उदासीन और टालमटोल वाले रवैये को लेकर गांव में काफी गुस्सा है।

इसी पानी की किल्लत के विरोध में गांव की करीब 30 से 40 गुस्साई महिलाएं सीधे ग्राम पंचायत दफ्तर पहुंचीं और वहां हंडा मोर्चा निकाला। महिलाओं ने प्रशासन को जमकर घेरा। उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर गांव के पानी का मसला जल्दी हल नहीं हुआ तो वे आंदोलन छेड़ देंगी।

स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के मुताबिक घोड नदी के पास काळेवाडी-दरेकरवाडी ग्रामपंचायत का एक कुआं है। इस कुएं के साथ आसपास के दो-तीन और कुओं का जलस्तर पूरी तरह नीचे चला गया है। इसी इलाके में नदी के स्तर के पास एक नए कुएं की खुदाई भी चल रही है।

ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस नई खुदाई की वजह से ही आसपास के पुराने कुओं का पानी सूख गया है। उन्होंने मांग की है कि इसकी तुरंत तकनीकी जांच कराई जाए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल आंबेगाव पंचायत समिति की खंड विकास अधिकारी प्रमिला वाळुंज से मिला। उन्होंने महिलाओं को पीने के पानी को लेकर हो रही परेशानी के बारे में बताया। उस वक्त खंड विकास अधिकारी ने तकनीकी वजह बताई कि आपका गांव आधिकारिक तौर पर जल संकटग्रस्त घोषित नहीं है, इसलिए अभी टैंकर शुरू नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी पूछा कि आपकी बस्ती में अधिग्रहण के लिए कोई कुआं उपलब्ध है क्या।

महिलाओं की मांग है कि प्रशासन कागजी नियमों पर अड़े रहने के बजाय गावरवाडी के असली हालात देखकर फौरन मौका-मुआयना करे। उनका कहना है कि कुओं के जलस्तर की तकनीकी जांच करके, कुआं अधिग्रहण समेत किसी वैकल्पिक इंतजाम से तुरंत पानी की सप्लाई शुरू की जाए।

पानी इंसान की बुनियादी जरूरत है। महिलाओं को पानी के लिए जो पैदल भटकना पड़ता है, उसे रोकने के लिए प्रशासन ठोस और स्थायी उपाय करे, यह मांग अब जोर पकड़ने लगी है। गांव में टैंकर से पानी की सप्लाई और स्थायी इंतजाम, दोनों की मांग की जा रही है।

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