गन्ने का पहला भुगतान 4,200 रुपये दो: राजू शेट्टी, हाईवे पर तीसरे दिन भी डटे किसान
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने गन्ने के पहले भुगतान की मांग घटाकर 4,200 रुपये की है। पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर रास्ता रोको का तीसरा दिन है।
गन्ने के दाम को लेकर किसानों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी की अगुवाई में चल रहा रास्ता रोको आंदोलन आज, 5 नवंबर को तीसरे दिन में पहुंच गया। राज्य में इस वक्त विरोधी पक्ष काफी आक्रामक दिख रहा है। एक तरफ कोल्हापुर में गोकुल दूध संघ के चेयरमैन के चुनाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ है, तो दूसरी तरफ गन्ने के दाम के सवाल पर किसानों का संघर्ष और तेज हो गया है।
कोल्हापुर जिले के किणी टोल नाके और सातारा के नागठाणे में हजारों किसान हाईवे पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि मांगें माने बिना वे पीछे नहीं हटेंगे। इसकी वजह से पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक पूरी तरह अटक गया है।
शुरू में स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की मांग थी कि गन्ने को प्रति टन 4,500 रुपये का पहला भुगतान मिले। लेकिन चीनी कारखानों के मालिक 3,800 रुपये से ऊपर जाने को तैयार नहीं थे, इसलिए बातचीत आगे नहीं बढ़ रही थी।
अब किसानों का नुकसान न हो और बातचीत से रास्ता निकले, इसके लिए राजू शेट्टी ने एक कदम पीछे हटते हुए 4,200 रुपये के पहले भुगतान की नई मांग रखी है। उन्होंने कारखानों के मालिकों से अपील की है कि वे अड़ियल रवैया छोड़ें और किसानों को वाजिब दाम दें।
किणी टोल नाके पर हुई सभा में शेट्टी ने कारखाना मालिकों को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों के दरवाजे पर खड़ा है और दिवाली सिर पर है। ऐसे में अगर किसानों को न्याय नहीं मिला, तो चीनी कारखानों के चेयरमैन और डायरेक्टरों के घर के सामने होली आंदोलन किया जाएगा।
आंदोलन की वजह से किणी टोल नाके और नागठाणे इलाके में गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं। सातारा से कोल्हापुर की ओर जाने वाली गाड़ियों को दूसरे रास्तों से जाना पड़ रहा है। भारी ट्रकों की आवाजाही पर भी बड़ा असर पड़ा है।
किसानों ने पूरी रात हाईवे पर ही गुजारी। खास बात यह है कि गांव-गांव की महिलाओं ने आगे आकर आंदोलन करने वालों के लिए रोटी, सब्जी और खाने का इंतजाम किया है।
अब शेट्टी के 4,200 रुपये का प्रस्ताव रखने के बाद सबकी नजर इस पर है कि कारखाना मालिक क्या रुख अपनाते हैं। यह देखना अहम होगा कि कोई हल निकलता है या आंदोलन और भड़कता है।
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