गडचांदूर के महात्मा गांधी कॉलेज ऑफ सायन्स में दो दिन चली अंतरराष्ट्रीय परिषद, करीब 300 पेपर पेश
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26 और 27 अक्टूबर 2026 को हुई परिषद में 400 से ज्यादा शोधकर्ताओं ने पंजीकरण कराया और आठ तकनीकी सत्र हुए।
गडचांदूर के महात्मा गांधी कॉलेज ऑफ साइंस में 26 और 27 अक्टूबर 2026 को दो दिन की अंतरराष्ट्रीय परिषद हुई। परिषद का विषय था International Confidence on Innovative Research in Science and Technology। मकसद था विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में होने वाले शोध को बढ़ावा देना। शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों, विद्यार्थियों और विज्ञान के जानकारों ने इसमें दिल खोलकर हिस्सा लिया।
आयोजकों के मुताबिक परिषद के लिए 400 से ज्यादा शोधकर्ताओं ने पंजीकरण कराया था। विज्ञान संकाय के करीब 300 शोधकर्ता विद्यार्थियों और प्रोफेसरों ने अलग-अलग विषयों पर अपने शोध पेपर पेश किए।
पहले दिन उद्घाटन समारोह हुआ, जिसमें डॉ. अनिल चिताडे प्रमुख अतिथि और उद्घाटक के तौर पर मौजूद थे। ACT के अध्यक्ष डॉ. वासुदेव गुरनुले प्रमुख वक्ता थे और उन्होंने मुख्य भाषण (Keynote Address) दिया। डॉ. आर के शुक्ला भी प्रमुख अतिथि के रूप में हाजिर थे। अपने मार्गदर्शन में उन्होंने विज्ञान और तकनीक के बदलते स्वरूप, शोध के नए अवसरों, आधुनिक तकनीक के असर और समाज के काम आने वाले शोध की जरूरत पर विस्तार से बात की। उन्होंने शोधकर्ताओं से कहा कि वे सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि नए प्रयोग, शोध और तकनीक के जरिए समाज के विकास में अपना योगदान दें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गडचांदुर शिक्षण प्रसारक मंडल के सचिव श्री धनंजयजी गोरे ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि कॉलेज को पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ शोध के क्षेत्र में भी आगे आना चाहिए। उनके मुताबिक ऐसी अंतरराष्ट्रीय परिषदों से विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को अपना शोध रखने, दूसरे शोधकर्ताओं से विचारों का आदान-प्रदान करने और शोध की नई दिशाएं समझने का मौका मिलता है।
परिषद के समन्वयक डॉ. रामकृष्ण वाय. पटले ने परिषद की अवधारणा, उद्देश्य और आयोजन के पीछे की सोच बताई। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के शोध को गति देना, शोधकर्ताओं को मंच देना, अलग-अलग विषयों के शोध की जानकारी एक-दूसरे तक पहुंचाना और शोध संस्कृति विकसित करना इस परिषद का मुख्य मकसद है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र देव मुख्य आयोजक थे और पूरी योजना और आयोजन की जिम्मेदारी उन्होंने कामयाबी से निभाई।
उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. संदीप घोडिले ने किया और प्रो. चेतन वानखेडे ने आभार माना। इसके बाद पहले दिन कुल पांच तकनीकी सत्र हुए। इनमें शोधकर्ताओं ने अपने विषयों के निष्कर्ष, प्रयोग, नई अवधारणाएं और शोध पद्धतियां पेश कीं। हर सत्र में उन्हें अपने शोध का स्पष्टीकरण देने और मौजूद विशेषज्ञों से मार्गदर्शन और सुझाव लेने का मौका मिला।
दूसरे दिन बाकी तीन तकनीकी सत्र हुए। इस तरह दो दिन में कुल आठ तकनीकी सत्र पूरे हुए। परिषद में खासकर रसायन विज्ञान (Chemistry), भौतिक विज्ञान (Physics), सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) और गणित (Mathematics) से जुड़े शोध पेपर पेश किए गए। इन प्रस्तुतियों से अलग-अलग विषयों के शोध की जानकारी, नई पद्धतियों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीक की प्रगति का आदान-प्रदान हुआ।
परिषद की एक और खास बात रही Best Researcher Award। रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान और गणित, इन चार विषयों में उत्कृष्ट शोध करने वाले शोधकर्ताओं को यह पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इससे शोधकर्ताओं का हौसला बढ़ा और बेहतर काम करने की प्रेरणा मिली।
दूसरे दिन समापन सत्र उत्साह भरे माहौल में हुआ। डॉ. मनोहर बांद्रे ने आभार प्रदर्शन में परिषद के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी गणमान्य लोगों, शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों, विद्यार्थियों, तकनीकी सत्रों के अध्यक्षों, परीक्षकों और आयोजन समिति के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया।
कुल मिलाकर 400 से ज्यादा पंजीकरण, करीब 300 शोध पेपर की प्रस्तुतियों और आठ तकनीकी सत्रों के साथ महात्मा गांधी कॉलेज ऑफ साइंस, गडचांदूर की यह दो दिन की अंतरराष्ट्रीय परिषद कामयाब रही। आयोजकों के मुताबिक इससे कॉलेज की शैक्षणिक, शोध संबंधी और वैज्ञानिक यात्रा में एक अहम पड़ाव आया है और इलाके की शोध संस्कृति को नई दिशा मिली है।
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