सोम‌वार, 19 अक्टूबर 2026

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09:13 IST

ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियान बोले, इतनी ताकत बनाएंगे कि दुश्मन हमला न कर सके

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने सैन्य और तकनीकी क्षमता बढ़ाने का इरादा जताया और परमाणु हथियार बनाने से इनकार किया।

ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियान बोले, इतनी ताकत बनाएंगे कि दुश्मन हमला न कर सके तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रही फौजी तनातनी बहुत नाजुक मोड़ पर पहुंच गई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने हाल ही में देश की सैन्य और तकनीकी नीति को लेकर एक अहम ऐलान किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को साफ संदेश दिया कि ईरान अपनी एडवांस तकनीक की क्षमता इतनी मजबूत करना चाहता है कि दुनिया का कोई भी दुश्मन उस पर हमला करने की हिम्मत न कर सके।

स्रोत के मुताबिक पिछले कुछ सालों में ईरान के अलग-अलग ठिकानों और अहम जगहों पर हमले हुए हैं। इन्हें देखते हुए ईरान ने अपनी रक्षा व्यवस्था और सैन्य ताकत को नए स्तर पर ले जाने का बड़ा फैसला किया है। पिछले साल जून में और फिर इस साल की शुरुआत में ईरान पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद तेहरान ने अपनी रणनीति में बड़े बदलाव शुरू किए हैं।

पेज़ेशकियान ने देश के मिसाइल कार्यक्रम और आधुनिक तकनीक की उपलब्धियों की तारीफ की। उनका कहना था कि यह कामयाबी ईरान की वैज्ञानिक क्षमता और इंसानी संसाधनों की जीती-जागती मिसाल है। तस्नीम न्यूज़ एजेंसी का नाम यहां नहीं, पर एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक के मैदान में ईरान ने उल्लेखनीय काम किया है, लेकिन देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए मौजूदा हालत से कहीं ज्यादा तरक्की की जरूरत है।

उनके इस बयान के बाद दुनिया भर में, खासकर पश्चिमी देशों में, यह सवाल उठ रहा था कि क्या ईरान चुपचाप परमाणु बम बनाने की तरफ बढ़ रहा है। इस पर राष्ट्रपति ने पूरी मजबूती से कहा कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है और आगे भी ऐसा कोई विचार नहीं है।

अपनी बात को वजन देने के लिए उन्होंने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के उस मशहूर फतवे (Fatwa) को दोहराया, जिसमें इस्लामी सिद्धांतों के आधार पर परमाणु हथियार बनाने और इस्तेमाल करने पर पूरी पाबंदी लगाई गई है। अमेरिका और इस्राइल लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि ईरान पर्दे के पीछे परमाणु कार्यक्रम चला रहा है। ईरान ने इस आरोप को हमेशा की तरह खारिज किया है और कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक और ऊर्जा की जरूरतों तक सीमित है।

अपने भाषण में पेज़ेशकियान ने सिर्फ फौजी ताकत पर जोर नहीं दिया, बल्कि देश के अंदरूनी विकास और शिक्षा की बात भी की। उन्होंने कहा, "ईरान का भविष्य हमारी नौजवान पीढ़ी के हाथ में है। हम सबको मिलकर ऐसी पीढ़ी तैयार करनी चाहिए जो बेहद संवेदनशील, नैतिक, रचनात्मक और हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हो।" उन्होंने रेखांकित किया कि देश को अभेद्य ताकत बनाने के लिए सिर्फ हथियार काफी नहीं हैं। शिक्षा व्यवस्था में जड़ से सुधार वक्त की जरूरत है। काबिल नागरिक तैयार करने में शिक्षा बुनियादी भूमिका निभाती है, इसीलिए ईरान अपने वैज्ञानिक और शैक्षणिक क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है।

ईरान के राजनीतिक रुख को दोहराते हुए पेज़ेशकियान ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी टकराव के बजाय बातचीत (Negotiations) के लिए हमेशा तैयार है। लेकिन यह बातचीत बराबरी के स्तर पर और इज्जत के माहौल में होनी चाहिए। उन्होंने वॉशिंगटन को चेतावनी देते हुए कहा, "अमेरिका को लगता है कि वह हम पर आर्थिक पाबंदियां थोपकर और फौजी दबाव बनाकर हमें समर्पण के लिए मजबूर कर सकता है। लेकिन ईरान कभी किसी दादागिरी या ताकत के इस्तेमाल के आगे नहीं झुकेगा।"

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की लगाई कड़ी आर्थिक पाबंदियां मानवाधिकारों के दायरे में नहीं आतीं, और अमेरिका व इस्राइल की तरफ से ईरान पर हुए हालिया हमले बेहद अमानवीय हैं। पेज़ेशकियान के मुताबिक ईरान अपनी सैन्य और मिसाइल क्षमता में ऐसी क्रांति लाने की तैयारी में है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन (Balance of Power) बदल जाएगा और दुश्मन को ईरान पर कदम रखने से पहले सौ बार सोचना पड़ेगा।

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