दिवाली से पहले नागपुर में अलसी, अरंडी और सरसों का तेल चढ़ा, पेंट कंपनियों की मांग बढ़ी
दिवाली से पहले नागपुर के तेल बाजार में अलसी, अरंडी और सरसों तेल के दाम बढ़े हैं। पेंट और डिस्टेंपर कंपनियों की मांग इसकी बड़ी वजह है।
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दिवाली नजदीक आते ही नागपुर के तेल बाजार में कुछ तेलों के दाम ऊपर चढ़ गए हैं। अलसी, अरंडी और सरसों के तेल में तेजी दिख रही है, जबकि सोयाबीन तेल का भाव अपनी जगह टिका हुआ है।
बाजार में सबसे ज्यादा उछाल अलसी तेल में आया है। पेंट और डिस्टेंपर बनाने वाली कंपनियां इसकी खरीदारी बढ़ा रही हैं, इसलिए एक महीने में यह तेल 1,050 रुपये महंगा होकर 3,300 रुपये प्रति 15 किलो टिन पर पहुंच गया है। करीब एक महीने पहले इसका भाव 2,250 रुपये प्रति टिन था।
तेल व्यापारी अनिल अग्रवाल के अनुसार, पेंट और डिस्टेंपर उद्योग में अलसी तेल की खपत बढ़ने से इसके दाम में बड़ा उछाल आया है। अलसी यानी जवस का तेल इसी वजह से महंगा हुआ है। दिवाली के दौरान दीपक जलाने के लिए भी अलसी तेल की मांग निकल रही है। यानी उद्योग की खपत के साथ त्योहार की अतिरिक्त मांग को भी भाव बढ़ने की वजह माना जा रहा है।
अरंडी तेल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। दोनों तेलों की खरीदारी पेंट और डिस्टेंपर कंपनियां बढ़ा रही हैं। करीब एक महीने पहले अरंडी तेल 2,500 रुपये प्रति 15 किलो टिन बिक रहा था। अब यह 400 रुपये बढ़कर 2,900 रुपये प्रति टिन तक पहुंच गया है। औद्योगिक मांग बढ़ने से बाजार में इसके भाव मजबूत बने हुए हैं।
सरसों तेल के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं। बाजार में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार में किसान अपनी सरसों की फसल बाजार में नहीं बेच रहे हैं। इससे सरसों की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। करीब एक महीने पहले सरसों तेल 2,550 रुपये प्रति 15 किलो टिन था और अब 2,800 रुपये प्रति टिन पर आ गया है।
दूसरी तरफ सोयाबीन तेल की कीमत 2,550 रुपये प्रति 15 किलो टिन पर स्थिर बनी हुई है।
थोक बाजार में औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी खरीदारी के कारण कीमतें लगातार मजबूत हो रही हैं। त्योहार के मौसम में तेलों के दाम बढ़ने का असर कारोबारियों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। अलसी और अरंडी की बढ़ती औद्योगिक मांग और सरसों की उपलब्धता पर दबाव के चलते बाजार में कीमतों की यह तेजी चर्चा का विषय बनी हुई है।
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