60 के बाद दिल का रखें ख्याल, कार्डियक अरेस्ट का खतरा घटाने पर कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह
मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शंकर माचिगर ने बुजुर्गों के लिए दिल को स्वस्थ रखने की बातें बताई हैं।
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देशभर में बुजुर्गों के बीच दिल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ रही हैं। इसी को देखते हुए 60 साल के बाद अचानक आने वाले कार्डियक अरेस्ट का खतरा कम करने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। मुंबई के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शंकर माचिगर ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से दिल को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
उम्र बढ़ने के साथ कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए समय-समय पर दिल की जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। सिर्फ बढ़ती उम्र ही दिल की बीमारी की वजह नहीं है। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और कसरत की कमी जैसी बातें भी इसमें शामिल हैं। सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करने से भी दिल को खतरा हो सकता है। इसलिए हर किसी को, खासकर बुजुर्गों को, संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।
पहली बात ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज को काबू में रखने की है। अगर हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी दिक्कतें ठीक तरह से काबू में न रखी जाएं, तो वक्त के साथ वे दिल और शरीर की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कई बार शुरुआत में इन दिक्कतों के लक्षण साफ नहीं दिखते और शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान होता रहता है।
इसलिए बुजुर्गों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर की बताई दवाएं वक्त पर लेनी चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए और न ही उनकी डोज में बदलाव करना चाहिए।
दूसरी बात दिल की नियमित जांच की है। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर या HbA1c और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। धड़कन तेज या अनियमित होना, सीने में दर्द या बेचैनी, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर ECG कराने की सलाह दे सकते हैं। अगर डॉक्टर को दिल की बनावट या उसके ठीक से काम न करने का शक हो, तो इकोकार्डियोग्राम भी किया जा सकता है। वक्त पर जांच होने से दिल से जुड़ी दिक्कतें जल्दी पकड़ में आ सकती हैं।
तीसरी बात दवाओं की है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल काबू में रखने के लिए डॉक्टर की बताई दवाएं नियमित लेनी चाहिए और कोई भी डोज अपने मन से नहीं छोड़नी चाहिए। डॉक्टर को बताए बिना कोई नई दवा शुरू नहीं करनी चाहिए और चल रही दवा बंद भी नहीं करनी चाहिए। किसी दवा से तकलीफ हो या उसके बारे में कोई सवाल हो तो डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
चौथी बात रोजाना शारीरिक हलचल की है। बुजुर्गों को ज्यादा देर एक ही जगह बैठे रहने या लगातार लेटे रहने से बचना चाहिए। रोज थोड़ा चलना, टहलना और हल्की स्ट्रेचिंग करना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। नियमित हलचल से दिल की कार्यक्षमता अच्छी रखने, मांसपेशियां मजबूत रखने और शरीर की चाल-ढाल बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे बुजुर्गों को रोजमर्रा के काम करने में भी सहूलियत मिल सकती है।
हालांकि बुजुर्गों को बहुत ज्यादा या कठिन कसरत नहीं करनी चाहिए। कोई भी नई कसरत या फिटनेस रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या योग करना हो तो वह विशेषज्ञों की निगरानी में करना बेहतर है।
आखिरी बात दिल से जुड़े खतरे के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की है। सीने में दर्द या दबाव महसूस होना, अचानक सांस लेने में तकलीफ, बेहोश हो जाना, बिना किसी साफ वजह के बहुत कमजोरी लगना, धड़कन का अचानक तेज या अनियमित होना और अचानक चक्कर आना जैसे लक्षणों को यह समझकर टालना नहीं चाहिए कि ये सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। इन लक्षणों को वक्त पर पहचानना और सही समय पर डॉक्टर की सलाह लेना बहुत अहम है। दिल को स्वस्थ रखने और दिल से जुड़ी दिक्कतों का खतरा घटाने के लिए बुजुर्गों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए, डॉक्टर की सलाह माननी चाहिए, दवाएं वक्त पर लेनी चाहिए और अपनी क्षमता के हिसाब से नियमित शारीरिक हलचल करनी चाहिए।