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06:04 IST

देवी को नींबू की माला क्यों चढ़ाते हैं, जानिए कथा और श्रद्धा

कुछ जगहों पर दुर्गा देवी और कालिका माता की पूजा में नींबू की माला चढ़ाने की परंपरा है। इसके पीछे की कथा और मान्यताएं यहां हैं।

देवी को नींबू की माला क्यों चढ़ाते हैं, जानिए कथा और श्रद्धा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

हिंदू धर्म में शक्ति की उपासना को बहुत अहम माना जाता है। दुर्गा देवी, कालिका माता और तुलजा भवानी जैसी देवियों की पूजा में फूल, हार, कुंकू और नारियल के साथ कुछ जगहों पर नींबू की माला भी चढ़ाई जाती है। खासकर देवी के उग्र रूप की उपासना में इस परंपरा की अहम जगह है। इस प्रथा के पीछे कुछ पौराणिक कथाएं, लोकश्रद्धा और प्रतीकात्मक मतलब बताए जाते हैं।

कुछ लोकपरंपराओं में कथा सुनाई जाती है कि देवी शाकंभरी या कालिका माता ने निंबासुर नाम के राक्षस का वध किया था। नींबू की माला की परंपरा इसी कथा से जोड़ी जाती है। कहा जाता है कि देवी ने दुष्ट शक्तियों का नाश करके भक्तों की रक्षा की थी, उसी की याद में उन्हें नींबू की माला चढ़ाई जाती है। हालांकि इस कथा का कोई सर्वमान्य पुराणों पर आधारित संदर्भ है, यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता।

भारतीय लोकपरंपरा में नींबू का इस्तेमाल नज़र उतारने और बुरी चीज़ों से बचाव के लिए किया जाता है। इसी श्रद्धा से देवी को नींबू की माला चढ़ाने की प्रथा चल पड़ी। भक्तों की मान्यता है कि देवी के चरणों में नींबू की माला चढ़ाने से संकट दूर होते हैं और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। लेकिन इस बात के वैज्ञानिक सबूत नहीं हैं कि नींबू में नकारात्मक ऊर्जा सोखने या ग्रहदोष दूर करने की कोई खास ताकत होती है।

हिंदू धर्म में 108 की संख्या का खास धार्मिक महत्त्व है। जपमाला के 108 मनके, मंत्रजाप और कई धार्मिक विधियों में इसी संख्या का इस्तेमाल होता है। इसी तरह कुछ देवी मंदिरों में 108 नींबुओं की माला चढ़ाने की प्रथा है। इस माला को देवी के प्रति श्रद्धा, भक्तिभाव और पूरे समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

महिषासुरमर्दिनी दुर्गा और कालिका माता को आदिशक्ति के ताकतवर रूप माना जाता है। इनकी उपासना में नींबू की माला चढ़ाकर भक्त संकटों से जूझने की ताकत, दुश्मनों से सुरक्षा और ज़िंदगी की अड़चनें दूर होने की प्रार्थना करते हैं। कुछ जगहों पर यह लोकमान्यता बताई जाती है कि नींबू के खट्टे स्वाद या खास गुणों से देवी का उग्र स्वभाव शांत होता है। मगर यह सर्वमान्य शास्त्रीय सिद्धांत नहीं है।

देवी को नींबू की माला चढ़ाने की परंपरा श्रद्धा, लोकसंस्कृति और शक्ति की उपासना से जुड़ी है। हर इलाके में देवी की पूजा के तरीके अलग हो सकते हैं। इन परंपराओं का मूल भाव देवी के प्रति आभार जताना, उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करना और ज़िंदगी की मुश्किलों से लड़ने के लिए आध्यात्मिक बल पाना है। भक्त के लिए माला का हर नींबू देवी पर विश्वास और समर्पण का प्रतीक बन जाता है।

धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई जैसे विषयों के लेख सिर्फ पाठकों की जानकारी के लिए हैं। इनसे जुड़ा कोई भी प्रयोग करने से पहले जानकार की सलाह ज़रूरी है।

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