शनिवार, 7 नवंबर 2026

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दर्यापुर में विधायक निधि की एंबुलेंस पर सियासी खींचतान, गरीब मरीज परेशान

दर्यापुर में विधायक निधि की एंबुलेंस पर सियासी खींचतान, गरीब मरीज परेशान तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

विधायक बलवंत वानखेड़े के स्थानीय विकास निधि से दर्यापुर नगर परिषद को मिली एंबुलेंस के इस्तेमाल पर मतभेद है। 25 अगस्त के प्रस्ताव पर बहस फिर शुरू हो गई है।

अमरावती जिले के दर्यापुर में नगर परिषद की एक एंबुलेंस राजनीतिक विवाद में फंस गई है। गरीब और जरूरतमंद लोग अस्पताल तक पहुंच सकें, इसी मकसद से यह एंबुलेंस विधायक बलवंत वानखेड़े के स्थानीय विकास निधि से दर्यापुर नगर परिषद को दी गई थी। अब इसके इस्तेमाल को लेकर नगर परिषद में मतभेद खड़े हो गए हैं।

आरोप लगाया जा रहा है कि खर्च का हवाला देकर यह सेवा किनारे कर दी जा रही है। इसी वजह से नगर परिषद के 25 अगस्त के प्रस्ताव की चर्चा फिर शुरू हो गई है।

पहले दर्यापुर नगर परिषद में भाजपा की सत्ता थी। उस वक्त कांग्रेस के विधायक बलवंत वानखेड़े ने अपने विधायक निधि से यह एंबुलेंस उपलब्ध कराई थी। इसका मुख्य मकसद यह था कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को वक्त पर मेडिकल मदद मिल सके। कई जरूरतमंद लोगों को इसका फायदा भी मिला। सत्ता बदलने के बाद भी कुछ समय तक यह एंबुलेंस मरीजों की सेवा में चलती रही।

लेकिन नगर परिषद में कांग्रेस की सत्ता आई और उसके बाद महापौर के साथ कांग्रेस के कुछ पार्षद शिवसेना (शिंदे गुट) की राह पर चले गए। तब से एंबुलेंस का मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। चर्चा है कि डीजल-पेट्रोल, ड्राइवर का मानदेय, देखभाल और मरम्मत का खर्च न उठा पाने की बात कही जा रही है।

25 अगस्त के प्रस्ताव का विरोध करते हुए एक आपत्ति दर्ज कराई गई है। आपत्ति यह है कि स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हबीब खान को भरोसे में लिए बिना फैसला लिया गया। लोगों का कहना है कि जनहित के लिए मिली यह एंबुलेंस नागरिकों की सेवा में ही रहनी चाहिए।

प्राइवेट एंबुलेंस का किराया आम आदमी के बस की बात नहीं है। ऐसे में नगर परिषद की सुविधा बंद हो जाए तो गरीब मरीजों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। इसलिए नागरिकों की मांग है कि राजनीतिक मतभेद एक तरफ रखकर एंबुलेंस फिर से शुरू की जाए और उसका ठीक से इस्तेमाल हो।

विवाद के मुख्य बिंदु साफ हैं। नगर परिषद का प्रस्ताव 25 अगस्त को हुआ था। स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष को भरोसे में न लेने पर आपत्ति है। एंबुलेंस के खर्च का मुद्दा गरम है और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।

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