बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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20:31 IST

चीनी शोधकर्ताओं को प्रशांत महासागर की तलहटी में मिले 11,700 नए वायरस

चीनी शोधकर्ताओं की टीम ने प्रशांत महासागर की गहरी तलहटी में वायरस की 11,700 नई किस्में खोजी हैं। टीम के मुताबिक इंसानों को फिलहाल सीधा खतरा नहीं है।

चीनी शोधकर्ताओं को प्रशांत महासागर की तलहटी में मिले 11,700 नए वायरस तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

चीन के शोधकर्ताओं की एक टीम ने प्रशांत महासागर की बहुत गहरी तलहटी में वायरस की 11,700 नई किस्मों का पता लगाया है। ये सारे वायरस समुद्र के तल पर पड़े पॉलिमेटॅलिक नोड्यूल यानी धातुओं के भंडार वाले इलाके में मिले हैं। यह जानकारी शुरुआती तौर पर सामने आई है।

दिलचस्प बात यह है कि टीम वायरस की तलाश में थी ही नहीं। चीनी शोधकर्ता असल में समुद्र के नीचे मौजूद कीमती धातुओं और खनिजों के भंडार की जांच कर रहे थे। इन खनिजों का अध्ययन करते हुए उन्हें अचानक इन बेहद छोटे, मगर बहुत बड़ी संख्या वाले वायरसों की प्रजातियां मिल गईं।

जब इन वायरसों की जेनेटिक बनावट का अध्ययन शुरू हुआ तो शोधकर्ता भी हैरान रह गए। सभी 11,700 वायरस जेनेटिक तौर पर एक-दूसरे से बहुत करीब से जुड़े हैं। यानी इन्हें एक ही परिवार या जैविक वर्ग का माना जा रहा है। माइक्रोबायोलॉजी की भाषा में ये सब कौडोव्हिरिसेट्स (Caudoviricetes) वर्ग में आते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इन वायरसों के सिरे पर सुई जैसी एक तीखी बनावट होती है, जिसे टेल स्ट्रक्चर कहा गया है। इस सुई जैसी बनावट से ये वायरस किसी भी बैक्टीरिया की कोशिकाओं में अपना जेनेटिक मटेरियल सीधे घुसा सकते हैं।

लैब में किए गए अध्ययन में सामने आया कि ये वायरस इंसानी शरीर में या पर्यावरण में मौजूद बेहद अहम बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करने की क्षमता रखते हैं। ये समुद्र के आम तत्वों के मुकाबले काफी भारी हैं और इनके संक्रमण फैलाने का तरीका बहुत आक्रामक बताया गया है।

क्या इंसानों को इनसे सीधा खतरा है? चीनी शोधकर्ताओं की टीम ने फौरन सफाई दी है कि मौजूदा हालात में इन 11,700 वायरसों से इंसानी सेहत या आम नागरिकों को कोई सीधा खतरा नहीं है। टीम के मुताबिक ये वायरस समुद्र में हजारों मीटर नीचे, बहुत ज्यादा दबाव और ठंडे तापमान में रहते हैं, इसलिए इनके इंसानी बस्तियों तक पहुंचने की संभावना फिलहाल न के बराबर है।

लेकिन अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जगत में, खासकर मशहूर शोध पत्रिका नेचर (Nature) ने इस पर चिंता जताई है। नेचर के मुताबिक ये वायरस भले अभी इंसानों पर हमला नहीं कर रहे, पर ये इंसानी शरीर या पर्यावरण के काम के बैक्टीरिया को मार सकते हैं। पत्रिका के अनुसार अगर भविष्य में ये वायरस म्यूटेट हुए या समुद्री जीवों के जरिए इंसान की खाद्य श्रृंखला में पहुंचे तो यह गंभीर चुनौती बन सकता है। इसीलिए नेचर का कहना है कि चीन को इस शोध के सारे आंकड़े पारदर्शी तरीके से दुनिया के सामने रखने चाहिए।

वुहान की प्रयोगशाला से कोरोना वायरस निकलने के वक्त भी शुरुआत में चीन पर उसके खतरे की गंभीरता दुनिया से छिपाने का आरोप दुनियाभर से लगाया जाता रहा है। 2019 में वुहान से फैले कोरोना ने दुनियाभर में तबाही मचाई थी, 71 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई और करोड़ों लोगों को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। इसी वजह से अब 11,700 नए वायरसों की जानकारी आने पर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन और वैज्ञानिक तबका सतर्क हो गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समुद्र की तलहटी में ऐसे अरबों अनजाने वायरस दबे पड़े हैं, और इंसानी दखल से अगर ये बाहर आए तो दुनिया को नई जैविक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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