यूएन महासभा में ईरान और क्यूबा को लेकर अमेरिका को चीन का करारा जवाब
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें अधिवेशन में ट्रंप के बयानों के बाद चीन ने ईरान और क्यूबा के मुद्दे पर अमेरिका को सीधा जवाब दिया।
इस साल चल रहा संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां अधिवेशन पूरी दुनिया के लिए अहम माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ में सारे देश बराबर माने जाते हैं, इसमें न कोई देश गरीब है, न अमीर, न कोई बड़ा है, न छोटा। यही संयुक्त राष्ट्र संघ की सबसे बड़ी बात रही है। लेकिन पिछले कुछ सालों में अमेरिका में ट्रंप के सत्ता में आने के बाद और दुनियाभर में कंजर्वेटिव सोच का असर बढ़ने के बाद, खासकर अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र संघ की अहमियत को कम करके आंकना शुरू कर दिया है।
इन दोनों देशों ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को भी मानने से इनकार कर दिया है। इसकी झलक संयुक्त राष्ट्र के इस अधिवेशन में भी दिखी, जब नेतन्याहू का विरोध जताने के लिए कई देशों के प्रतिनिधि सभागृह से बाहर निकलने लगे। उस वक्त नेतन्याहू ने मंच की मर्यादा भूलकर बाहर जा रहे लोगों को देखकर उन्हें डरपोक और घबराया हुआ बताया। इसके साथ ही उन्होंने इजराइल पर लगे सारे आरोपों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने सीरिया के प्रधानमंत्री के सामने ग्रेटर इजराइल की अपनी सोच भी रख दी। वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने मंच से ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया, और यह सब पूरी दुनिया ने देखा। ट्रंप ने इस अंदाज में बात की जैसे देखते हैं ईरान हमारे सामने कैसे नहीं झुकता, और इस तरह उन्होंने ईरान पर अपनी राय रख दी। इसके जवाब में चीन ने भी वैसा ही तीखा रुख अपनाकर संतुलन बनाए रखने की कोशिश की।
ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इसके जवाब में चीन ने कहा कि सैन्य कार्रवाई की जगह बातचीत और कूटनीति के जरिए ईरान का मसला सुलझाया जाना चाहिए। चीन पहले भी अमेरिका की एकतरफा पाबंदियों और सैन्य दबाव का उतनी ही ताकत से विरोध करता आया है, और अमेरिका जो कहेगा वैसा ही कैसे होगा, इस पर चीन ने साफ आपत्ति जताई है।
ट्रंप ने अपने भाषण में क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार की भी आलोचना की और कहा कि अमेरिका क्यूबा के हालात में बुनियादी बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के इस बयान के दौरान क्यूबा का प्रतिनिधिमंडल सभागृह से बाहर निकल गया, ऐसी खबर भी सामने आई है।
चीन ने अपने भाषण में अमेरिका की विदेश नीति में एकतरफा दबाव और दखलअंदाजी की भूमिका का खुलकर विरोध किया। चीन ने कहा कि चाहे ईरान हो या क्यूबा, संबंधित देशों की संप्रभुता और उनके फैसले लेने के अधिकार का पूरी दुनिया को सम्मान करना चाहिए, और इस तरह चीन ने ट्रंप पर करारा पलटवार किया।
इसमें चीन ने कहीं भी यह सोचकर नरमी नहीं दिखाई कि जिनपिंग इस वक्त अमेरिका दौरे पर हैं। कहा जा रहा है कि अपने दोस्त देशों ईरान और क्यूबा के लिए चीन ने एक बार फिर अमेरिका को साफ शब्दों में चेतावनी दी है। और इसी वजह से चीन और अमेरिका के बीच विदेश नीति को लेकर मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं।